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Rigveda Mandal 1 / Sukta 79 / Mantra 10

191 Sukta
12 Mantra
1/79/10
Devata- अग्निः Rishi- गोतमो राहूगणः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
प्र पू॒तास्ति॒ग्मशो॑चिषे॒ वाचो॑ गोतमा॒ग्नये॑। भर॑स्व सुम्न॒युर्गिरः॑ ॥

प्र । पू॒ताः । ति॒ग्मऽशो॑चिषे । वाचः॑ । गोतम । अ॒ग्नये॑ । भर॑स्व । सु॒म्न॒ऽयुः । गिरः॑ ॥

Mantra without Swara
प्र पूतास्तिग्मशोचिषे वाचो गोतमाग्नये। भरस्व सुम्नयुर्गिरः ॥

प्र। पूताः। तिग्मऽशोचिषे। वाचः। गोतम। अग्नये। भरस्व। सुम्नऽयुः। गिरः ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 5 Varga » 28 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
हे (गोतम) अत्यन्त स्तुति और (सुम्नयुः) सुख की इच्छा करनेवाले विद्वान् ! तू (तिग्मशोचिषे) तीक्ष्ण बुद्धि प्रकाशवाले (अग्नये) विज्ञानरूप और विज्ञानवाले विद्वान् के लिये (पूताः) पवित्र करनेवाली (गिरः) विद्या की शिक्षा और उपदेश से युक्त वाणियों को धारण करते हैं, उन (वाचः) वाणियों को (प्र भरस्व) सब प्रकार धारण कर ॥ १० ॥
Essence
जिस कारण परमेश्वर और परम विद्वान् के विना कोई दूसरा सत्यविद्या के प्रकाश करने को समर्थ नहीं होता, इसलिए ईश्वर और विद्वान् की सदा सेवा करनी चाहिये ॥ १० ॥
Subject
फिर भी अगले मन्त्र में विद्वान् कैसा हो, इस विषय का उपदेश किया है ॥