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Rigveda Mandal 1 / Sukta 78 / Mantra 3

191 Sukta
5 Mantra
1/78/3
Devata- अग्निः Rishi- गोतमो राहूगणः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
तमु॑ त्वा वाज॒सात॑ममङ्गिर॒स्वद्ध॑वामहे। द्यु॒म्नैर॒भि प्र णो॑नुमः ॥

तम् । ऊँ॒ इति॑ । त्वा॒ । वा॒ज॒ऽसात॑मम् । अ॒ङ्गि॒र॒स्वत् । ह॒वा॒म॒हे॒ । द्यु॒म्नैः । अ॒भि । प्र । नो॒नु॒मः॒ ॥

Mantra without Swara
तमु त्वा वाजसातममङ्गिरस्वद्धवामहे। द्युम्नैरभि प्र णोनुमः ॥

तम्। ऊँ इति। त्वा। वाजऽसातमम्। अङ्गिरस्वत्। हवामहे। द्युम्नैः। अभि। प्र। नोनुमः ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 5 Varga » 26 Mantra » 3

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Meaning
हे विद्वन् ! (द्युम्नैः) पुण्यरूपी कीर्तियों के साथ जिस (वाजसातमम्) अतिप्रशंसित बोधों से युक्त विद्वान् की और (त्वा) आपकी हम लोग (हवामहे) स्तुति करें (उ) अच्छे प्रकार (अङ्गिरस्वत्) प्रशंसित प्राण के समान (अभि) सब ओर से (प्र णोनुमः) सत्कार करते हैं सो तुम (तम्) उसी की स्तुति और प्रणाम किया करो ॥ ३ ॥
Essence
हे मनुष्यो ! तुम लोग विद्वान् को उक्त प्रकार के सत्कार से सन्तुष्ट करके धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को सिद्ध करो ॥ ३ ॥
Subject
फिर वह विद्वान् कैसा हो, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है ॥

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