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Rigveda Mandal 1 / Sukta 75 / Mantra 3

191 Sukta
5 Mantra
1/75/3
Devata- अग्निः Rishi- गोतमो राहूगणः Chhanda- विराड्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
कस्ते॑ जा॒मिर्जना॑ना॒मग्ने॒ को दा॒श्व॑ध्वरः। को ह॒ कस्मि॑न्नसि श्रि॒तः ॥

कः । ते॒ । जा॒मिः । जना॑नाम् । अग्ने॑ । कः । दा॒शुऽअ॑ध्वरः । कः । ह॒ । कस्मि॑न् । अ॒सि॒ । श्रि॒तः ॥

Mantra without Swara
कस्ते जामिर्जनानामग्ने को दाश्वध्वरः। को ह कस्मिन्नसि श्रितः ॥

कः। ते। जामिः। जनानाम्। अग्ने। कः। दाशुऽअध्वरः। कः। ह। कस्मिन्। असि। श्रितः ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 5 Varga » 23 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
हे (अग्ने) विद्वन् ! (जनानाम्) मनुष्यों के बीच (ते) आपका (कः) कौन मनुष्य (ह) निश्चय करके (जामिः) जाननेवाला है (कः) कौन (दाश्वध्वरः) दान देने और रक्षा करनेवाला है, तू (कः) कौन है और (कस्मिन्) किसमें (श्रितः) आश्रित (असि) है, इस सब बात का उत्तर दे ॥ ३ ॥
Essence
बहुत मनुष्यों में कोई ऐसा होता है कि जो परमेश्वर और अग्न्यादि पदार्थों को ठीक-ठीक जाने और जनावे, क्योंकि ये दोनों अत्यन्त आश्चर्य्य गुण, कर्म और स्वभाववाले हैं ॥ ३ ॥
Subject
फिर वह कैसा हो, यह विषय कहा है ॥