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Rigveda Mandal 1 / Sukta 75 / Mantra 2

191 Sukta
5 Mantra
1/75/2
Devata- अग्निः Rishi- गोतमो राहूगणः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अथा॑ ते अङ्गिरस्त॒माग्ने॑ वेधस्तम प्रि॒यम्। वो॒चेम॒ ब्रह्म॑ सान॒सि ॥

अथ॑ । ते॒ । अ॒ङ्गि॒रः॒ऽत॒म॒ । अ॒ग्ने॒ । वे॒धः॒ऽत॒म॒ । प्रि॒यम् । वो॒चेम॑ । ब्रह्म॑ । सा॒न॒सि ॥

Mantra without Swara
अथा ते अङ्गिरस्तमाग्ने वेधस्तम प्रियम्। वोचेम ब्रह्म सानसि ॥

अथ। ते। अङ्गिरःऽतम। अग्ने। वेधःऽतम। प्रियम्। वोचेम। ब्रह्म। सानसि ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 5 Varga » 23 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
हे (अङ्गिरस्तम) सब विद्याओं के जानने और (वेधस्तम) अत्यन्त धारण करनेवाले (अग्ने) विद्वान् ! जैसे हम लोग वेदों को पढ़ के (अथ) इसके पीछे (ते) तुझे (सानसि) सदा से वर्त्तमान (प्रियम्) प्रीतिकारक (ब्रह्म) चारों वेदों का (वोचेम) उपदेश करें, वैसे ही तू कर ॥ २ ॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। वेदादि सत्यशास्त्रों के उपदेश के विना किसी मनुष्य को परमेश्वर और विद्युत् अग्नि आदि पदार्थों के विषय का ज्ञान नहीं होता ॥ २ ॥
Subject
फिर उससे विद्वान् क्या कहें, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है ॥