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Rigveda Mandal 1 / Sukta 74 / Mantra 6

191 Sukta
9 Mantra
1/74/6
Devata- अग्निः Rishi- गोतमो राहूगणः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
आ च॒ वहा॑सि॒ ताँ इ॒ह दे॒वाँ उप॒ प्रश॑स्तये। ह॒व्या सु॑श्चन्द्र वी॒तये॑ ॥

आ । च॒ । वहा॑सि । तान् । इ॒ह । दे॒वान् । उप॑ । प्रऽश॑स्तये । ह॒व्या । सु॒ऽच॒न्द्र॒ । वी॒तये॑ ॥

Mantra without Swara
आ च वहासि ताँ इह देवाँ उप प्रशस्तये। हव्या सुश्चन्द्र वीतये ॥

आ। च। वहासि। तान्। इह। देवान्। उप। प्रऽशस्तये। हव्या। सुऽचन्द्र। वीतये ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 5 Varga » 22 Mantra » 1

Bhashya

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Meaning
हे (सुश्चन्द्र) अच्छे आनन्द देनेवाले विद्वान् ! आप (इह) इस संसार में (प्रशस्तये) प्रशंसा (च) और (वीतये) सुखों की प्राप्ति के लिये जिन (हव्या) ग्रहण के योग्य (देवान्) दिव्य गुणों वा विद्वानों को (उपावहासि) समीप में सब प्रकार प्राप्त हों (तान्) उन आप को हम लोग प्राप्त होवें ॥ ५ ॥
Essence
जब तक मनुष्य परमेश्वर के जानने के लिये धर्मात्मा विद्वान् पुरुषों से शिक्षा और अग्नि आदि पदार्थों से उपकार लेने में ठीक-ठीक पुरुषार्थ नहीं करते, तब तक पूर्ण विद्या को प्राप्त कभी नहीं हो सकते ॥ ६ ॥
Subject
फिर वह कैसा हो, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है ॥

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