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Rigveda Mandal 1 / Sukta 74 / Mantra 3

191 Sukta
9 Mantra
1/74/3
Devata- अग्निः Rishi- गोतमो राहूगणः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
उ॒त ब्रु॑वन्तु ज॒न्तव॒ उद॒ग्निर्वृ॑त्र॒हाज॑नि। ध॒नं॒ज॒यो रणे॑रणे ॥

उ॒त । ब्रु॒व॒न्तु॒ । ज॒न्तवः॑ । उत् । अ॒ग्निः । वृ॒त्र॒ऽहा । अ॒ज॒नि॒ । ध॒न॒म्ऽज॒यः । रणे॑ऽरणे ॥

Mantra without Swara
उत ब्रुवन्तु जन्तव उदग्निर्वृत्रहाजनि। धनंजयो रणेरणे ॥

उत। ब्रुवन्तु। जन्तवः। उत्। अग्निः। वृत्रऽहा। अजनि। धनम्ऽजयः। रणेऽरणे ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 5 Varga » 21 Mantra » 3

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
जो (रणेरणे) युद्ध-युद्ध में (धनञ्जयः) धन से जितानेवाला (वृत्रहा) मेघ को नष्ट करनेहारे सूर्य्य के समान (अग्निः) परमेश्वर (दाशुषे) विद्या, शुभ गुणों के दान करनेवाले मनुष्य के लिये (गयम्) धन को (उदजनि) उत्पन्न करता है (उत्) और भी जिसका विद्वान् लोग उपदेश करते हैं (जन्तवः) सब मनुष्य (अध्वरम्) हिंसारहित (मन्त्रम्) उसी के विचार को (उपब्रुवन्तु) परस्पर उपदेश करें ॥ ३ ॥
Essence
हे मनुष्यो ! तुम जिसके आश्रय से शत्रुओं के पराजय द्वारा अपने विजय से राज्यधनों की प्राप्ति होती है, उस परमेश्वर का नित्य सेवन किया करो ॥ ३ ॥
Subject
फिर वह कैसा है, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है ॥