Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 73 / Mantra 7

191 Sukta
10 Mantra
1/73/7
Devata- अग्निः Rishi- पराशरः शाक्तः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
त्वे अ॑ग्ने सुम॒तिं भिक्ष॑माणा दि॒वि श्रवो॑ दधिरे य॒ज्ञिया॑सः। नक्ता॑ च च॒क्रुरु॒षसा॒ विरू॑पे कृ॒ष्णं च॒ वर्ण॑मरु॒णं च॒ सं धुः॑ ॥

त्वे । अ॒ग्ने॒ । सु॒ऽम॒तिम् । भिक्ष॑माणाः । दि॒वि । श्रवः॑ । द॒धि॒रे॒ । य॒ज्ञियाः॑ । नक्ता॑ । च॒ । च॒क्रुः । उ॒षसा । विरू॑पे॒ इति॒ विऽरू॑पे । कृ॒ष्णम् । च॒ । वर्ण॑म् । अ॒रु॒णम् । च॒ । सम् । धु॒रिति॑ धुः ॥

Mantra without Swara
त्वे अग्ने सुमतिं भिक्षमाणा दिवि श्रवो दधिरे यज्ञियासः। नक्ता च चक्रुरुषसा विरूपे कृष्णं च वर्णमरुणं च सं धुः ॥

त्वे। अग्ने। सुऽमतिम्। भिक्षमाणाः। दिवि। श्रवः। दधिरे। यज्ञियाः। नक्ता। च। चक्रुः। उषसा। विरूपे इति विऽरूपे। कृष्णम्। च। वर्णम्। अरुणम्। च। सम्। धुरिति धुः ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 5 Varga » 20 Mantra » 2

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे (अग्ने) पढ़ानेहारे विद्वान् ! जो (दिवि) प्रकाशस्वरूप (त्वे) आपके समीप स्थित हुए (भिक्षमाणाः) विद्याओं ही की भिक्षा करनेवाले (यज्ञियासः) अध्ययनरूप कर्मचतुर विद्वान् लोग (सुमतिम्) उत्तमबुद्धि को (दधिरे) धारण करते तथा (श्रवः) श्रवण वा अन्न को (संधुः) धारण करते हैं (नक्ता) रात्री (च) और (उषसा) दिन के साथ (कृष्णम्) श्याम (अरुणम्) लाल (वर्णम्) वर्ण को (च) तथा इनसे भिन्न वर्णों से युक्त पदार्थों को धारण करते हैं (च) और (विरूपे) विरुद्ध रूपों का विज्ञान (चक्रुः) करते हैं, वे सुखी होते हैं ॥ ७ ॥
Essence
परमेश्वर की सृष्टि के विज्ञान के विना कोई मनुष्य पूर्ण विद्वान् होने को समर्थ नहीं होता। जैसे रात्री-दिवस भिन्न-भिन्न रूपवाले हैं, वैसे ही अनुकूल और विरुद्ध धर्मादि के विज्ञान से सब पदार्थों को जान के उपयोग में लेवें ॥ ७ ॥
Subject
वे मनुष्य कैसे हों, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है ॥

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.