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Rigveda Mandal 1 / Sukta 73 / Mantra 10

191 Sukta
10 Mantra
1/73/10
Devata- अग्निः Rishi- पराशरः शाक्तः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
ए॒ता ते॑ अग्न उ॒चथा॑नि वेधो॒ जुष्टा॑नि सन्तु॒ मन॑से हृ॒दे च॑। श॒केम॑ रा॒यः सु॒धुरो॒ यमं॒ तेऽधि॒ श्रवो॑ दे॒वभ॑क्तं॒ दधा॑नाः ॥

ए॒ता । ते॒ । अ॒ग्ने॒ । उ॒चथा॑नि । वे॒धः॒ । जुष्टा॑नि । स॒न्तु॒ । मन॑से । हृ॒दे । च॒ । श॒केम॑ । रा॒यः । सु॒ऽधुरः॑ । यम॑म् । ते॒ । अधि॑ । श्रवः॑ । दे॒वऽभ॑क्तम् । दधा॑नाः ॥

Mantra without Swara
एता ते अग्न उचथानि वेधो जुष्टानि सन्तु मनसे हृदे च। शकेम रायः सुधुरो यमं तेऽधि श्रवो देवभक्तं दधानाः ॥

एता। ते। अग्ने। उचथानि। वेधः। जुष्टानि। सन्तु। मनसे। हृदे। च। शकेम। रायः। सुऽधुरः। यमम्। ते। अधि। श्रवः। देवऽभक्तम्। दधानाः ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 5 Varga » 20 Mantra » 5

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1 Bhashyas
Meaning
हे (वेधः) सबके अन्तःकरण में रहने से सबको बुद्धिप्रद धर्त्ता (अग्ने) विज्ञान के देनेवाले जगदीश्वर (ते) आपकी कृपा से (एता) (उचथानि) वेदवचन हम लोगों के (मनसे) मन (च) और (हृदे) आत्मा के लिये (जुष्टानि) सेवन किये हुए प्रीतिकारक (सन्तु) होवें, वे (ते) आपके सम्बन्ध से (यमम्) नियम करने (देवभक्तम्) विद्वानों ने सेवन किये हुए (श्रवः) श्रवण को (दधानाः) धारण करते हुए (सुधुरः) उत्तम पदार्थों के धारण करनेवाले हम लोग (रायः) धनों के प्राप्त होने को (अधि शकेम) समर्थ हों ॥ १० ॥
Essence
मनुष्यों को चाहिये कि आप सब सुखों को प्राप्त होकर और सभी के लिये प्राप्त करावें ॥ १० ॥ इस सूक्त में ईश्वर, अग्नि, विद्वान् और सूर्य के गुणों का वर्णन होने से इस सूक्तार्थ की पूर्वसूक्तार्थ के साथ सङ्गति समझनी उचित है ॥
Subject
फिर उसको उसके सहाय से क्या प्राप्त होता है, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है ॥