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Rigveda Mandal 1 / Sukta 72 / Mantra 7

191 Sukta
10 Mantra
1/72/7
Devata- अग्निः Rishi- पराशरः शाक्तः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
वि॒द्वाँ अ॑ग्ने व॒युना॑नि क्षिती॒नां व्या॑नु॒षक्छु॒रुधो॑ जी॒वसे॑ धाः। अ॒न्त॒र्वि॒द्वाँ अध्व॑नो देव॒याना॒नत॑न्द्रो दू॒तो अ॑भवो हवि॒र्वाट् ॥

वि॒द्वान् । अ॒ग्ने॒ । व॒युना॑नि । क्षि॒ती॒नाम् । वि । आ॒नु॒षक् । शु॒रुधः॑ । जी॒वसे॑ । धाः॒ । अ॒न्तः॒ऽवि॒द्वान् । अध्व॑नः । दे॒व॒ऽयाना॑न् । अत॑न्द्रः । दू॒तः । अ॒भ॒वः॒ । ह॒विः॒ऽवाट् ॥

Mantra without Swara
विद्वाँ अग्ने वयुनानि क्षितीनां व्यानुषक्छुरुधो जीवसे धाः। अन्तर्विद्वाँ अध्वनो देवयानानतन्द्रो दूतो अभवो हविर्वाट् ॥

विद्वान्। अग्ने। वयुनानि। क्षितीनाम्। वि। आनुषक्। शुरुधः। जीवसे। धाः। अन्तःऽविद्वान्। अध्वनः। देवऽयानान्। अतन्द्रः। दूतः। अभवः। हविःऽवाट् ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 5 Varga » 18 Mantra » 2

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Meaning
हे (अग्ने) सब सुख प्राप्त करनेवाले जगदीश्वर ! जिस कारण (अन्तर्विद्वान्) अन्तःकरण के सब व्यवहारों को तथा (विद्वान्) बाहर के कार्य्यों को जाननेवाले (अतन्द्रः) आलस्यरहित (हविर्वाट्) विज्ञान आदि प्राप्त करानेवाले आप (क्षितीनाम्) मनुष्यों के (वयुनानि) विज्ञानों को (जीवसे) जीवन के लिये (शुरुधः) प्राप्त करने योग्य सुखों को (आनुषक्) अनुकूलतापूर्वक (वि धाः) विविध प्रकार से धारण करते हो, वेदद्वारा (देवयानान्) विद्वानों के जाने-आनेवाले (अध्वनः) मार्गों के (दूतः) विज्ञान करानेवाले (अभवः) होते हो, इससे आपका सत्कार हम लोग अवश्य करें ॥ ७ ॥
Essence
इस मन्त्र में श्लेषालङ्कार है। जो प्रार्थना वा सेवन किया हुआ ईश्वर धर्ममार्ग वा विज्ञान को दिखाकर सुखों को देता है, उनका सेवन अवश्य करना चाहिये ॥ ७ ॥
Subject
फिर भी अगले मन्त्र में ईश्वर के गुणों का उपदेश किया है ॥

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