Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 72 / Mantra 4

191 Sukta
10 Mantra
1/72/4
Devata- अग्निः Rishi- पराशरः शाक्तः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
आ रोद॑सी बृह॒ती वेवि॑दानाः॒ प्र रु॒द्रिया॑ जभ्रिरे य॒ज्ञिया॑सः। वि॒दन्मर्तो॑ ने॒मधि॑ता चिकि॒त्वान॒ग्निं प॒दे प॑र॒मे त॑स्थि॒वांस॑म् ॥

आ । रोद॑सी॒ इति॑ । बृ॒ह॒ती इति॑ । वेवि॑दानाः॑ । प्र । रु॒द्रिया॑ । ज॒भ्रि॒रे॒ । य॒ज्ञिया॑सः । वि॒दत् । मर्तः॑ । ने॒मऽधि॑ता । चि॒कि॒त्वान् । अ॒ग्निम् । प॒दे । प॒र॒मे । त॒स्थि॒ऽवांस॑म् ॥

Mantra without Swara
आ रोदसी बृहती वेविदानाः प्र रुद्रिया जभ्रिरे यज्ञियासः। विदन्मर्तो नेमधिता चिकित्वानग्निं पदे परमे तस्थिवांसम् ॥

आ। रोदसी इति। बृहती इति। वेविदानाः। प्र। रुद्रिया। जभ्रिरे। यज्ञियासः। विदत्। मर्तः। नेमऽधिता। चिकित्वान्। अग्निम्। पदे। परमे। तस्थिऽवांसम् ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 5 Varga » 17 Mantra » 4

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
जो (रुद्रिया) दुष्ट शत्रुओं को रुलानेवाले के सम्बन्धी (वेविदानाः) अत्यन्त ज्ञानयुक्त (यज्ञियासः) यज्ञ की सिद्धि करनेवाले विद्वान् लोग (बृहती) बड़े (रोदसी) भूमि राज्य वा विद्या प्रकाश को (आजभ्रिरे) धारण-पोषण करते और समग्र विद्याओं को जानते हैं, उनसे विज्ञान को प्राप्त होकर जो (चिकित्वान्) ज्ञानवान् (नेमधिता) प्राप्त पदार्थ को धारण करनेवाला (मर्त्तः) मनुष्य (परमे) सबसे उत्तम (पदे) प्राप्त करने योग्य मोक्ष पद में (तस्थिवांसम्) स्थित हुए (अग्निम्) परमेश्वर को (प्रविदत्) जानता है, वही सुख भोगता है ॥ ४ ॥
Essence
मनुष्यों को चाहिये कि वेद के जाननेवाले विद्वानों से उत्तम नियम द्वारा वेदविद्या को प्राप्त हो विद्वान् होके परमेश्वर तथा उसके रचे हुए जगत् को जान अन्य मनुष्यों के लिये निरन्तर विद्या देवें ॥ ४ ॥
Subject
वेदों के पढ़नेवाले किस प्रकार के हों, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है ॥