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Rigveda Mandal 1 / Sukta 71 / Mantra 3

191 Sukta
10 Mantra
1/71/3
Devata- अग्निः Rishi- पराशरः शाक्तः Chhanda- विराट्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
दध॑न्नृ॒तं ध॒नय॑न्नस्य धी॒तिमादिद॒र्यो दि॑धि॒ष्वो॒३॒॑ विभृ॑त्राः। अतृ॑ष्यन्तीर॒पसो॑ य॒न्त्यच्छा॑ दे॒वाञ्जन्म॒ प्रय॑सा व॒र्धय॑न्तीः ॥

दध॑न् । ऋ॒तम् । ध॒नय॑न् । अ॒स्य॒ । धी॒तिम् । आत् । इत् । अ॒र्यः । द॒धि॒ष्वः॑ । विऽभृ॑त्राः । अतृ॑ष्यन्तीः । अ॒पसः॑ । य॒न्ति । अच्छ॑ । दे॒वान् । जन्म॑ । प्रय॑सा । व॒र्धय॑न्तीः ॥

Mantra without Swara
दधन्नृतं धनयन्नस्य धीतिमादिदर्यो दिधिष्वो३ विभृत्राः। अतृष्यन्तीरपसो यन्त्यच्छा देवाञ्जन्म प्रयसा वर्धयन्तीः ॥

दधन्। ऋतम्। धनयन्। अस्य। धीतिम्। आत्। इत्। अर्यः। दिधिष्वः। विऽभृत्राः। अतृष्यन्तीः। अपसः। यन्ति। अच्छ। देवान्। जन्म। प्रयसा। वर्धयन्तीः ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 5 Varga » 15 Mantra » 3

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
जो (विभृत्राः) विशेष धारण करनेवाली (दिधिष्वः) भूषण आदि से युक्त (अतृष्यन्तीः) तृष्णा आदि दोषों से पृथक् (वर्धयन्तीः) उन्नति करनेवाली कुमारी कन्या (देवान्) दिव्य गुणों को प्राप्त होकर (अर्य्यः) वैश्य के (इत्) समान (ऋतम्) सत्य विज्ञान को (धनयन्) विद्याधनयुक्त कर (आत्) इसके अनन्तर (अस्य) ब्रह्मचर्य की (धीतिम्) धारणा को (दधन्) धारण कर (प्रयसा) अन्न के समान वर्त्तमान (अपसः) कर्म्म (देवान्) विद्वान् (जन्म) और विद्या की प्राप्ति को (अच्छ) अच्छे प्रकार (यन्ति) प्राप्त होती हैं, वेदादि शास्त्रों में विद्वान् होकर सब सुखों को प्राप्त होती हैं ॥ ३ ॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है। जैसे वैश्य लोग धर्म्म के अनुकूल धन का संचय करते हैं, वैसे ही कन्या विवाह से पहले ब्रह्मचर्यपूर्वक पूर्ण विद्वान् पढ़ानेवाली स्त्रियों को प्राप्त हो पूर्णशिक्षा और विद्या का ग्रहण तथा विवाह करके प्रजासुख को सम्पादन करे। विवाह के पीछे विद्याध्ययन का समय नहीं समझना चाहिये। किसी पुरुष वा स्त्री को विद्या के पढ़ने का अधिकार नहीं है, ऐसा किसी को नहीं समझना चाहिये, किन्तु सर्वथा सबको पढ़ने का अधिकार है ॥ ३ ॥
Subject
जैसे ब्रह्मचर्याश्रम का सेवन करके पुरुष विद्वान् होते हैं, वैसे स्त्रियों को भी होना योग्य है, यह विषय कहा है ॥