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Rigveda Mandal 1 / Sukta 70 / Mantra 6

191 Sukta
11 Mantra
1/70/6
Devata- अग्निः Rishi- पराशरः शाक्तः Chhanda- साम्नीपङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
ए॒ता चि॑कित्वो॒ भूमा॒ नि पा॑हि दे॒वानां॒ जन्म॒ मर्तां॑श्च वि॒द्वान् ॥

ए॒ता । चि॒कि॒त्वः॒ । भूम॒ । नि । पा॒हि॒ । दे॒वाना॑म् । जन्म॑ । मर्ता॑न् । च॒ । वि॒द्वान् ॥

Mantra without Swara
एता चिकित्वो भूमा नि पाहि देवानां जन्म मर्तांश्च विद्वान् ॥

एता। चिकित्वः। भूम। नि। पाहि। देवानाम्। जन्म। मर्तान्। च। विद्वान् ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 5 Varga » 14 Mantra » 6

Bhashya

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Meaning
हे (चिकित्वः) ज्ञानवान् जगदीश्वर वा (विद्वान्) जाननेवाले ! (यः) जो (क्षपावान्) जिसमें उत्तम बहुत रात्रि हैं (अग्निः) सब सुखों की देनेवाली बिजुली के समान (अस्मै) इन (रयीणाम्) विद्यारत्न राज्य आदि पदार्थों की (अरम्) पूर्णप्राप्ति के लिये (एता) इन (अरम्) पूर्ण (सूक्तैः) उत्तम वचनों से (भूम) बहुत (देवानाम्) दिव्यगुण वा विद्वानों के (जन्म) जन्म (मर्त्तान्) मनुष्य (च) मनुष्य से भिन्नों को (दाशत्) देते हो (सः) सो आप (हि) निश्चय करके इनकी (नि पाहि) निरन्तर रक्षा कीजिये ॥ ३ ॥
Essence
इस मन्त्र में श्लेष और वाचकलुप्तोपमालङ्कार हैं। मनुष्यों को जो परमेश्वर वा विद्वान् वेद वा अन्तर्यामि द्वारा तथा उपदेशों से सब मनुष्यों के लिये सब विद्याओं को देता है, उसकी उपासना तथा सत्सङ्ग करना चाहिये ॥ ३ ॥
Subject
फिर वह मनुष्य कैसा हो, इस विषय को अगले मन्त्र में कहा है ॥

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