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Rigveda Mandal 1 / Sukta 69 / Mantra 7

191 Sukta
10 Mantra
1/69/7
Devata- अग्निः Rishi- पराशरः शक्तिपुत्रः Chhanda- द्विपदा विराट् Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
नकि॑ष्ट ए॒ता व्र॒ता मि॑नन्ति॒ नृभ्यो॒ यदे॒भ्यः श्रु॒ष्टिं च॒कर्थ॑ ॥

नकिः॑ । ते॒ । ए॒ता । व्र॒ता । मि॒न॒न्ति॒ । नृऽभ्यः॑ । यत् । ए॒भ्यः । श्रु॒ष्टिम् । च॒कर्थ॑ ॥

Mantra without Swara
नकिष्ट एता व्रता मिनन्ति नृभ्यो यदेभ्यः श्रुष्टिं चकर्थ ॥

नकिः। ते। एता। व्रता। मिनन्ति। नृऽभ्यः। यत्। एभ्यः। श्रुष्टिम्। चकर्थ ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 5 Varga » 13 Mantra » 7

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे विद्वन् ! जो आपके (एताः) ये (व्रता) व्रत हैं वे कोई भी (नकिः) नहीं (मिनन्ति) हिंसा कर सकते हैं (यत्) जो आप (एभ्यः) इन (नृभ्यः) मनुष्यों के लिये (यत्) जिस (श्रुष्टिम्) शीघ्र सत्यविद्यासमूह को (चकर्थ) करते हो वा (रंपासि) सत्कर्म और व्यक्त उपदेशयुक्त वचनों को (विवेः) प्राप्त करते हो तथा (यत्) जो (ते) आप का (इदम्) यह (समानैः) विद्यादि गुणों में तुल्य (नृभिः) मनुष्यों के साथ (दंसः) कर्म है (तत्) उसको (तु) कोई मनुष्य (नकिः) नहीं (अहन्) हनन कर सकता, जो (युक्तः) युक्त होकर आप करते हो, उसको हम लोग भी सत्य ही जानते हैं ॥ ४ ॥
Essence
सब मनुष्यों को चाहिये कि जैसे परमेश्वर वा पूर्णविद्यायुक्त विद्वान् पक्षपात छोड़कर मनुष्यादि प्राणियों में सत्य उपकार करनेवाले कर्मों के साथ वर्त्तमान है, वैसे सदा वर्त्तें ॥ ४ ॥
Subject
फिर वह विद्वान् कैसा है, यह विषय अगले मन्त्र में कहा है ॥