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Rigveda Mandal 1 / Sukta 69 / Mantra 2

191 Sukta
10 Mantra
1/69/2
Devata- अग्निः Rishi- पराशरः शक्तिपुत्रः Chhanda- निचृत्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
परि॒ प्रजा॑तः॒ क्रत्वा॑ बभूथ॒ भुवो॑ दे॒वानां॑ पि॒ता पु॒त्रः सन् ॥

परि॑ । प्रऽजा॑तः । क्रत्वा॑ । ब॒भू॒थ॒ । भुवः॑ । दे॒वाना॑म् । पि॒ता । पु॒त्रः । सन् ॥

Mantra without Swara
परि प्रजातः क्रत्वा बभूथ भुवो देवानां पिता पुत्रः सन् ॥

परि। प्रऽजातः। क्रत्वा। बभूथ। भुवः। देवानाम्। पिता। पुत्रः। सन् ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 5 Varga » 13 Mantra » 2

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
जो मनुष्य (उषः) प्रातःकाल की वेला के (जारः) आयु के हन्ता सूर्य के (न) समान (शुक्रः) वीर्यवान् शुद्ध (शुशुक्वान्) शुद्ध कराने (पप्रा) अपनी विद्या से पूर्ण (युवः) भूमि के मध्य (दिवः) प्रकाश से (समीची) पृथिवी को प्राप्त हुए (ज्योतिः) दीप्ति के (न) समान (परि) सब प्रकार (प्रजातः) प्रसिद्ध उत्पन्न (क्रत्वा) उत्तम बुद्धि वा कर्म्म के साथ वर्त्तमान (देवानाम्) विद्वानों के (पुत्रः) पुत्र के तुल्य पढ़नेवाला सब विद्याओं को पढ़ के (पिता) पढ़ानेवाला (बभूथ) होता है, उसका सेवन सब मनुष्य करें ॥ १ ॥
Essence
इस मन्त्र में श्लेष और उपमालङ्कार हैं। विद्यार्थी न होके कोई भी मनुष्य विद्वान् नहीं हो सकता और किसी मनुष्य को बिजुली आदि विद्या तथा उसके संप्रयोग के विना बड़ा भारी सुख भी नहीं हो सकता ॥ १ ॥
Subject
अब उनहत्तरवें सूक्त का आरम्भ किया जाता है। इसके प्रथम मन्त्र में विद्वानों के गुणों का उपदेश किया है ॥