Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 68 / Mantra 5

191 Sukta
10 Mantra
1/68/5
Devata- अग्निः Rishi- पराशरः शाक्तः Chhanda- पङ्क्तिः Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
ऋ॒तस्य॒ प्रेषा॑ ऋ॒तस्य॑ धी॒तिर्वि॒श्वायु॒र्विश्वे॒ अपां॑सि चक्रुः ॥

ऋ॒तस्य॑ । प्रेषाः॑ । ऋ॒तस्य॑ । धी॒तिः । वि॒श्वऽआ॑युः । विश्वे॑ । अपां॑सि । च॒क्रुः॒ ॥

Mantra without Swara
ऋतस्य प्रेषा ऋतस्य धीतिर्विश्वायुर्विश्वे अपांसि चक्रुः ॥

ऋतस्य। प्रेषाः। ऋतस्य। धीतिः। विश्वऽआयुः। विश्वे। अपांसि। चक्रुः ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 5 Varga » 12 Mantra » 5

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
जिस ईश्वर वा विद्युत् अग्नि से (विश्वे) सब (प्रेषाः) अच्छी प्रकार जिनकी इच्छा की जाती है, वे बोधसमूह को प्राप्त होते हैं (ऋतस्य) सत्य विज्ञान तथा कारण का (धीतिः) धारण और (विश्वायुः) सब आयु प्राप्त होती है, उसका आश्रय करके जो (ऋतस्य) स्वरूप प्रवाह से सत्य के बीच वर्त्तमान विद्वान् लोग (अपांसि) न्याययुक्त कामों को (चक्रुः) करते हैं (यः) वा मनुष्य इस विद्या को (तुभ्यम्) ईश्वरोपासना, धर्म, पुरुषार्थयुक्त मनुष्य के लिये (दाशात्) देवे वा उससे ग्रहण करे (यः) जो (चिकित्वान्) ज्ञानवान् मनुष्य (ते) तेरे लिये (शिक्षात्) शिक्षा करे वा तुझ से शिक्षा लेवे (तस्मै) उसके लिये आप (रयिम्) सुवर्णादि धन को (दयस्व) दीजिये ॥ ३ ॥
Essence
इस मन्त्र में श्लेषालङ्कार है। मनुष्यों को ऐसा जानना चाहिये ईश्वर की रचना के विना जड़ कारण से कुछ भी कार्य उत्पन्न वा नष्ट होने तथा आधार के विना आधेय भी स्थित होने को समर्थ नहीं हो सकता और कोई मनुष्य कर्म से विना क्षण भर भी स्थित नहीं हो सकता। जो विद्वान् लोग विद्या आदि उत्तम गुणों को अन्य सज्जनों के लिये देते तथा उनसे ग्रहण करते हैं, उन्हीं दोनों का सत्कार करें, औरों का नहीं ॥ ३ ॥
Subject
फिर वे ईश्वर और विद्वान् कैसे हैं, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है ॥