Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 68 / Mantra 4

191 Sukta
10 Mantra
1/68/4
Devata- अग्निः Rishi- पराशरः शाक्तः Chhanda- निचृत्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
भज॑न्त॒ विश्वे॑ देव॒त्वं नाम॑ ऋ॒तं सप॑न्तो अ॒मृत॒मेवैः॑ ॥

भज॑न्त । विश्वे॑ । दे॒व॒ऽत्वम् । नाम॑ । ऋ॒तम् । सप॑न्तः । अ॒मृत॑म् । एवैः॑ ॥

Mantra without Swara
भजन्त विश्वे देवत्वं नाम ऋतं सपन्तो अमृतमेवैः ॥

भजन्त। विश्वे। देवऽत्वम्। नाम। ऋतम्। सपन्तः। अमृतम्। एवैः ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 5 Varga » 12 Mantra » 4

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (देव) जगदीश्वर ! आपका आश्रय करके (यत्) जो (विश्वे) सब (जनिष्ठाः) अतिज्ञान युक्त (सपन्तः) एक सम्मत विद्वान् लोग (एवैः) प्राप्तिकारक गुणों और (शुष्कात्) धर्मानुष्ठान के तप से (वा नीरस काष्ठादि से) (ते) आपके (देवत्वम्) दिव्य गुण प्राप्त करनेवाले (क्रतुम्) बुद्धि और कर्म (नाम) प्रसिद्ध अर्थयुक्त संज्ञा को सिद्ध (जुषन्त) प्रीति से सेवा करें, वे (ऋतम्) सत्य रूप को (भजन्त) सेवन करते हैं, वैसे (अमृतम्) मोक्ष को (जीवः) इच्छादि गुणवाला चेतनस्वरूप मनुष्य (आत्) इसके अनन्तर (इत्) ही इस सबको प्राप्त हो ॥ २ ॥
Essence
मनुष्य परमेश्वर की उपासना वा आज्ञानुष्ठान के विना व्यवहार और परमार्थ के सुखों को प्राप्त नहीं हो सकते ॥ २ ॥
Subject
फिर जगदीश्वर कैसा है, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है ॥