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Rigveda Mandal 1 / Sukta 68 / Mantra 3

191 Sukta
10 Mantra
1/68/3
Devata- अग्निः Rishi- पराशरः शाक्तः Chhanda- पङ्क्तिः Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
आदित्ते॒ विश्वे॒ क्रतुं॑ जुषन्त॒ शुष्का॒द्यद्दे॑व जी॒वो जनि॑ष्ठाः ॥

आत् । इत् । ते॒ । विश्वे॑ । क्रतु॑म् । जु॒ष॒न्त॒ । शुष्का॑त् । यत् । दे॒व॒ । जी॒वः । जनि॑ष्ठाः ॥

Mantra without Swara
आदित्ते विश्वे क्रतुं जुषन्त शुष्काद्यद्देव जीवो जनिष्ठाः ॥

आत्। इत्। ते। विश्वे। क्रतुम्। जुषन्त। शुष्कात्। यत्। देव। जीवः। जनिष्ठाः ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 5 Varga » 12 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
हे (देव) जगदीश्वर ! आपका आश्रय करके (यत्) जो (विश्वे) सब (जनिष्ठाः) अतिज्ञान युक्त (सपन्तः) एक सम्मत विद्वान् लोग (एवैः) प्राप्तिकारक गुणों और (शुष्कात्) धर्मानुष्ठान के तप से वा नीरस काष्ठादि से (ते) आपके (देवत्वम्) दिव्य गुण प्राप्त करनेवाले (क्रतुम्) बुद्धि और कर्म (नाम) प्रसिद्ध अर्थयुक्त संज्ञा को सिद्ध (जुषन्त) प्रीति से सेवा करें, वे (ऋतम्) सत्य रूप को (भजन्त) सेवन करते हैं, वैसे (अमृतम्) मोक्ष को (जीवः) इच्छादि गुणवाला चेतनस्वरूप मनुष्य (आत्) इसके अनन्तर (इत्) ही इस सबको प्राप्त हो ॥ २ ॥
Essence
मनुष्य परमेश्वर की उपासना वा आज्ञानुष्ठान के विना व्यवहार और परमार्थ के सुखों को प्राप्त नहीं हो सकते ॥ २ ॥
Subject
फिर जगदीश्वर कैसा है, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है ॥