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Rigveda Mandal 1 / Sukta 68 / Mantra 2

191 Sukta
10 Mantra
1/68/2
Devata- अग्निः Rishi- पराशरः शाक्तः Chhanda- पङ्क्तिः Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
परि॒ यदे॑षा॒मेको॒ विश्वे॑षां॒ भुव॑द्दे॒वो दे॒वानां॑ महि॒त्वा ॥

परि॑ । यत् । ए॒षा॒म् । एकः॑ । विश्वे॑षाम् । भुव॑त् । दे॒वः । दे॒वाना॑म् । म॒हि॒ऽत्वा ॥

Mantra without Swara
परि यदेषामेको विश्वेषां भुवद्देवो देवानां महित्वा ॥

परि। यत्। एषाम्। एकः। विश्वेषाम्। भुवत्। देवः। देवानाम्। महिऽत्वा ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 5 Varga » 12 Mantra » 2

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Meaning
(यत्) जो (भुरण्युः) धारण वा पोषण करनेवाला (श्रीणन्) परिक्व करता हुआ मनुष्य (दिवम्) प्रकाश करनेवाले परमेश्वर वा विद्युत् अग्नि के (उप स्थात्) उप स्थित होवे और (स्थातुः) स्थावर (चरथम्) जङ्गम तथा (अक्तून्) प्रकट प्राप्त करने योग्य पदार्थों को (पर्यूर्णोत्) आच्छादन वा स्वीकार करता है वह (एषाम्) इन वर्त्तमान (विश्वेषाम्) सब (देवानाम्) विद्वानों के बीच (एकः) सहायरहित (देवः) दिव्यगुणयुक्त (महित्वा) पूजा को प्राप्त होकर (विभुवत्) विभव अर्थात् ऐश्वर्य को प्राप्त होवे ॥ १ ॥
Essence
इस मन्त्र में श्लेषालङ्कार है। कोई परमेश्वर की उपासना वा विद्युत् अग्नि के आश्रय को छोड़कर सब परमार्थ और व्यवहार के सुखों को प्राप्त होने को योग्य नहीं हो सकता ॥ १ ॥
Subject
फिर वे ईश्वर और विद्युत् अग्नि कैसे गुणवाले हैं, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है ॥

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