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Rigveda Mandal 1 / Sukta 67 / Mantra 7

191 Sukta
10 Mantra
1/67/7
Devata- अग्निः Rishi- पराशरः शाक्तः Chhanda- द्विपदा विराट् Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
य ईं॑ चि॒केत॒ गुहा॒ भव॑न्त॒मा यः स॒साद॒ धारा॑मृ॒तस्य॑ ॥

यः । ई॒म् । चि॒केत॑ । गुहा॑ । भव॑न्तम् । आ । यः । स॒साद॑ । धारा॑म् । ऋ॒तस्य॑ ॥

Mantra without Swara
य ईं चिकेत गुहा भवन्तमा यः ससाद धारामृतस्य ॥

यः। ईम्। चिकेत। गुहा। भवन्तम्। आ। यः। ससाद। धाराम्। ऋतस्य ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 5 Varga » 11 Mantra » 7

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(यः) जो मनुष्य (गुहा) बुद्धि तथा विज्ञान में (ईम्) विज्ञानस्वरूप (भवन्तम्) जगदीश्वर वा सभाध्यक्ष को (चिकेत) जानता है (यः) जो (ऋतस्य) सत्य विद्यारूप चारों वेद वा जल के (धाराम्) वाणी वा प्रवाह को (आ ससाद) प्राप्त कराता है (ये) जो मनुष्य (ऋता) सत्यों को (सपन्तः) संयुक्त करते हुए (वसूनि) विद्या, सुवर्ण आदि धनों को (विचृतन्ति) ग्रन्थियुक्त करते हैं, जिसलिये परमेश्वर ने (प्र ववाच) कहा है (आत्) इसके पीछे (इत्) उसी के लिये सब सुख प्राप्त होते हैं ॥ ४ ॥
Essence
इस मन्त्र में श्लेषालङ्कार है। किसी मनुष्य को परमेश्वर की उपासना वा विज्ञान, सत्यविद्या और उत्तम आचरणों के विना सुख प्राप्त नहीं हो सकते ॥ ४ ॥
Subject
फिर भी ईश्वर और विद्वान् के गुणों का उपदेश करते हैं ॥