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Rigveda Mandal 1 / Sukta 66 / Mantra 3

191 Sukta
10 Mantra
1/66/3
Devata- अग्निः Rishi- पराशरः शाक्तः Chhanda- पङ्क्तिः Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
दा॒धार॒ क्षेम॒मोको॒ न र॒ण्वो यवो॒ न प॒क्वो जेता॒ जना॑नाम् ॥

दा॒धार॑ । क्षेम॑म् । ओकः॑ । न । र॒ण्वः॑ । यवः॑ । न । प॒क्वः । जेता॑ । जना॑नाम् ॥

Mantra without Swara
दाधार क्षेममोको न रण्वो यवो न पक्वो जेता जनानाम् ॥

दाधार। क्षेमम्। ओकः। न। रण्वः। यवः। न। पक्वः। जेता। जनानाम् ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 5 Varga » 10 Mantra » 3

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
जो मनुष्य (ओकः) घर के (न) समान (रण्वः) रमणीयस्वरूप (पक्वः) पके (यवः) सुख करनेवाले यव के (न) समान (ऋषिः) मन्त्रों के अर्थ को जाननेवाले विद्वान् के (न) समान (स्तुभ्वा) सत्कार के योग्य (वाजी) वेगवान् घोड़े के समान (प्रीतः) कमनीय (विक्षु) प्रजाओं में (प्रशस्त) श्रेष्ठ (जनानाम्) मनुष्य आदि प्राणियों को (जेता) सुख प्राप्त करानेवाला (वयः) जीवन (दधाति) धारण करता है, वह (क्षेमम्) रक्षा को (दाधार) धारण करता है ॥ २ ॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है। जो मनुष्य जीवन के निमित्त ब्रह्मचर्य्यादि कर्मों को काम की सिद्धि के लिये अच्छे प्रकार जानके युक्तिपूर्वक आहार और विहार के अर्थ यथायोग्य पदार्थों को धारण करते हैं, वे बहुत काल पर्यन्त जी के सदा सुखी होते हैं ॥ २ ॥
Subject
फिर वह मनुष्य कैसा हो, यह विषय अगले मन्त्र में कहा है ॥