Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 64 / Mantra 8

191 Sukta
15 Mantra
1/64/8
Devata- इन्द्र: Rishi- नोधा गौतमः Chhanda- जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
सिं॒हाइ॑व नानदति॒ प्रचे॑तसः पि॒शाइ॑व सु॒पिशो॑ वि॒श्ववे॑दसः। क्षपो॒ जिन्व॑न्तः॒ पृष॑तीभिर्ऋ॒ष्टिभिः॒ समित्स॒बाधः॒ शव॒साहि॑मन्यवः ॥

सिं॒हाःऽइ॑व । ना॒न॒द॒ति॒ । प्रऽचे॑तसः । पि॒शाःऽइ॑व । सु॒ऽपिशः॑ । वि॒श्वऽवे॑दसः । क्षपः॑ । जिन्व॑न्तः । पृष॑तीभिः । ऋ॒ष्टिऽभिः॑ । सम् । इत् । स॒ऽबाधः॒ । शव॑सा । अहि॑ऽमन्यवः ॥

Mantra without Swara
सिंहाइव नानदति प्रचेतसः पिशाइव सुपिशो विश्ववेदसः। क्षपो जिन्वन्तः पृषतीभिर्ऋष्टिभिः समित्सबाधः शवसाहिमन्यवः ॥

सिंहाःऽइव। नानदति। प्रऽचेतसः। पिशाःऽइव। सुऽपिशः। विश्वऽवेदसः। क्षपः। जिन्वन्तः। पृषतीभिः। ऋष्टिऽभिः। सम्। इत्। सऽबाधः। शवसा। अहिऽमन्यवः ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 5 Varga » 7 Mantra » 3

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! तुम लोग जो ये (प्रचेतसः) उत्तम विज्ञान होने के हेतु (सुपिशः) सुन्दर अवयवों के करनेवाले (सबाधः) पदार्थों को अपने नियम में रखनेवाले (अहिमन्यवः) मेघ की वर्षा का ज्ञान करानेवाले वायु (इत्) ही (ऋष्टिभिः) व्यवहारों के प्राप्त कराने और (पृषतीभिः) अपने गमनागमन वेगादिगुणों से (क्षपः) रात्रि को (संजिन्वन्तः) तृप्त करते हुए (विश्ववेदसः) सब कर्मों के प्राप्त करानेवाले पवन (शवसा) अपने बलों से (सिंहाइव) सिहों के समान तथा (पिशाइव) बड़े बलवाले हाथियों के समान (नानदति) अत्यन्त शब्द करते हैं, उनको कार्यों की सिद्धि के लिये यथावत् संयुक्त करो ॥ ८ ॥
Essence
इस मन्त्र में दो उपमालङ्कार हैं। हे मनुष्यो ! तुम ऐसा जानो कि जितना बल, पराक्रम, जीवन, सुनना, विचारना आदि क्रिया है, वे सब वायु के सकाश से ही होती हैं ॥ ८ ॥
Subject
फिर वे पूर्वोक्त वायु कैसे हैं, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है ॥

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.