Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 62 / Mantra 9

191 Sukta
13 Mantra
1/62/9
Devata- इन्द्र: Rishi- नोधा गौतमः Chhanda- निचृदार्षीत्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
सने॑मि स॒ख्यं स्व॑प॒स्यमा॑नः सू॒नुर्दा॑धार॒ शव॑सा सु॒दंसाः॑। आ॒मासु॑ चिद्दधिषे प॒क्वम॒न्तः पयः॑ कृ॒ष्णासु॒ रुश॒द्रोहि॑णीषु ॥

सने॑मि । स॒ख्यम् । सु॒ऽअ॒प॒स्यमा॑नः । सू॒नुः । दा॒धा॒र॒ । शव॑सा । सु॒ऽदंसाः॑ । आ॒मासु॑ । चि॒त् । द॒धि॒षे॒ । प॒क्वम् । अ॒न्तरिति॑ । पयः॑ । कृ॒ष्णासु॑ । रुश॑त् । रोहि॑णीषु ॥

Mantra without Swara
सनेमि सख्यं स्वपस्यमानः सूनुर्दाधार शवसा सुदंसाः। आमासु चिद्दधिषे पक्वमन्तः पयः कृष्णासु रुशद्रोहिणीषु ॥

सनेमि। सख्यम्। सुऽअपस्यमानः। सूनुः। दाधार। शवसा। सुऽदंसाः। आमासु। चित्। दधिषे। पक्वम्। अन्तरिति। पयः। कृष्णासु। रुशत्। रोहिणीषु ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 5 Varga » 2 Mantra » 4

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
जो (स्वपस्यमानः) उत्तम कर्मों को करते हुए के समान (सुदंसाः) उत्तम कर्म्मयुक्त (रुशत्) शुभ गुणों की प्राप्ति करता हुआ तू जैसे (सूनुः) सत्पुत्र अपने माता-पिता का पोषण करते हुए के समान रात्रि-दिन (सनेमि) प्राचीन (सख्यम्) मित्रपन के कालावयवों को (दाधार) धारण करता और (रोहिणीषु) उत्पन्नशील (कृष्णासु) सब प्रकार से पकी हुई (चित्) और (आमासु) कच्ची औषधियों के (अन्तः) मध्य में (पक्वम्) पक्व (पयः) रस को धारण करता है, वैसे (शवसा) बल के साथ गृहाश्रम को (दधिषे) धारण कर ॥ ९ ॥
Essence
विद्वानों को जैसे ये दिन-रात कच्चे-पक्के रसों से उत्पन्न करने और उत्पन्न हुए पदार्थों की वृद्धि वा नाश करनेवाले सबों के मित्र के समान वर्त्तमान है, वैसे सब मनुष्यों के साथ वर्त्तना योग्य है ॥ ९ ॥
Subject
फिर वे कैसे हों, यह विषय अगले मन्त्र में कहा है ॥