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Rigveda Mandal 1 / Sukta 62 / Mantra 12

191 Sukta
13 Mantra
1/62/12
Devata- इन्द्र: Rishi- नोधा गौतमः Chhanda- आर्षीत्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
स॒नादे॒व तव॒ रायो॒ गभ॑स्तौ॒ न क्षीय॑न्ते॒ नोप॑ दस्यन्ति दस्म। द्यु॒माँ अ॑सि॒ क्रतु॑माँ इन्द्र॒ धीरः॒ शिक्षा॑ शचीव॒स्तव॑ नः॒ शची॑भिः ॥

स॒नात् । ए॒व । तव॑ । रायः॑ । गभ॑स्तौ । न । क्षीय॑न्ते । न । उप॑ । द॒स्य॒न्ति॒ । द॒स्म॒ । द्यु॒मान् । अ॒सि॒ । क्रतु॑ऽमान् । इ॒न्द्र॒ । धीरः॑ शिक्ष॑ । श॒ची॒ऽवः॒ । तव॑ । नः॒ । शची॑भिः ॥

Mantra without Swara
सनादेव तव रायो गभस्तौ न क्षीयन्ते नोप दस्यन्ति दस्म। द्युमाँ असि क्रतुमाँ इन्द्र धीरः शिक्षा शचीवस्तव नः शचीभिः ॥

सनात्। एव। तव। रायः। गभस्तौ। न। क्षीयन्ते। न। उप। दस्यन्ति। दस्म। द्युमान्। असि। क्रतुऽमान्। इन्द्र। धीरः शिक्ष। शचीऽवः। तव। नः। शचीभिः ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 5 Varga » 3 Mantra » 1

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1 Bhashyas
Meaning
हे (दस्म) शत्रुओं के नाश करनेवाले (शचीवः) उत्तम बुद्धि वा वाणी से युक्त (इन्द्र) उत्तम धनवाले सभाध्यक्ष ! जो आप (द्युमान्) विद्यादि श्रेष्ठ गुणों के प्रकाश से युक्त (क्रतुमान्) बुद्धि से विचार कर कर्म करनेवाले ! (धीरः) ध्यानी (असि) हैं, उस (तव) आपके (गभस्तौ) राजनीति के प्रकाश में (सनात्) सनातन से (रायः) धन (नैव) नहीं (क्षीयन्ते) क्षीण तथा (तव) आपके प्रबन्ध में (न) नहीं (उपदस्यन्ति) नष्ट होते हैं, सो आप अपनी (शचीभिः) बुद्धि, वाणी और कर्म से (नः) हम लोगों को (शिक्ष) उपदेश दीजिये ॥ १२ ॥
Essence
मनुष्यो को चाहिये कि जो सनातन वेद के ज्ञान से शिक्षा को और सभापति आदि के अधिकार को प्राप्त होके प्रजा का पालन करे, उसी मनुष्य को धर्मात्मा जानें ॥ १२ ॥
Subject
अब अगले मन्त्र में सूर्य्य और सभापति आदि के गुणों का उपदेश किया है ॥