Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 61 / Mantra 12

191 Sukta
16 Mantra
1/61/12
Devata- इन्द्र: Rishi- नोधा गौतमः Chhanda- पङ्क्तिः Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
अ॒स्मा इदु॒ प्र भ॑रा॒ तूतु॑जानो वृ॒त्राय॒ वज्र॒मीशा॑नः किये॒धाः। गोर्न पर्व॒ वि र॑दा तिर॒श्चेष्य॒न्नर्णां॑स्य॒पां च॒रध्यै॑ ॥

अ॒स्मै । इत् । ऊँ॒ इति॑ । प्र । भ॒र॒ । तूतु॑जानः । वृ॒त्राय॑ । वज्र॑म् । ईशा॑नः । कि॒ये॒धाः । गोः । न । पर्व॑ । वि । र॒द॒ । तिर॑श्चा । इष्य॑न् । अर्णां॑सि । अ॒पाम् । च॒रध्यै॑ ॥

Mantra without Swara
अस्मा इदु प्र भरा तूतुजानो वृत्राय वज्रमीशानः कियेधाः। गोर्न पर्व वि रदा तिरश्चेष्यन्नर्णांस्यपां चरध्यै ॥

अस्मै। इत्। ऊँ इति। प्र। भर। तूतुजानः। वृत्राय। वज्रम्। ईशानः। कियेधाः। गोः। न। पर्व। वि। रद। तिरश्चा। इष्यन्। अर्णांसि। अपाम्। चरध्यै ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 4 Varga » 29 Mantra » 2

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे सभाध्यक्ष (कियेधाः) कितने गुणों को धारण करनेवाला (ईशानः) ऐश्वर्ययुक्त (तूतुजानः) शीघ्र करनेहारे आप जैसे सूर्य्य (अपाम्) जलों के सम्बन्ध से (अर्णांसि) जलों के प्रवाहों को (चरध्यै) बहाने के अर्थ (वृत्राय) मेघ के वास्ते वर्त्तता है, वैसे (अस्मै) इस शत्रु के वास्ते शस्त्र को (प्र) अच्छे प्रकार (भर) धारण कर (तिरश्चा) टेढ़ी गतिवाले वज्र से (गोर्न) वाणियों के विभाग के समान (पर्व) उस के अङ्ग-अङ्ग को काटने को (इष्यन्) इच्छा करता हुआ (इदु) ऐसे ही (विरद) अनेक प्रकार हनन कीजिये ॥ १२ ॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। हे सेनापते ! आप जैसे प्राणवायु से तालु आदि स्थानों में जीभ का ताड़न कर भिन्न-भिन्न अक्षर वा पदों के विभाग प्रसिद्ध होते हैं, वैसे ही सभाध्यक्ष शत्रु के बल को छिन्न-भिन्न और अङ्गों को विभागयुक्त करके इसी प्रकार शत्रुओं को जीता करे ॥ १२ ॥
Subject
फिर वह कैसा है, यह विषय अगले मन्त्र में कहा है ॥