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Rigveda Mandal 1 / Sukta 60 / Mantra 2

191 Sukta
5 Mantra
1/60/2
Devata- अग्निः Rishi- नोधा गौतमः Chhanda- भुरिक्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
अ॒स्य शासु॑रु॒भया॑सः सचन्ते ह॒विष्म॑न्त उ॒शिजो॒ ये च॒ मर्ताः॑। दि॒वश्चि॒त्पूर्वो॒ न्य॑सादि॒ होता॒पृच्छ्यो॑ वि॒श्पति॑र्वि॒क्षु वे॒धाः ॥

अ॒स्य । शासुः॑ । उ॒भया॑सः । स॒च॒न्ते॒ । ह॒विष्म॑न्तः । उ॒शिजः॑ । ये । च॒ । मर्ताः॑ । दि॒वः । चि॒त् । पूर्वः॑ । नि । अ॒सा॒दि॒ । होता॑ । आ॒ऽपृच्छ्यः॑ । वि॒श्पतिः॑ । वि॒क्षु । वे॒धाः ॥

Mantra without Swara
अस्य शासुरुभयासः सचन्ते हविष्मन्त उशिजो ये च मर्ताः। दिवश्चित्पूर्वो न्यसादि होतापृच्छ्यो विश्पतिर्विक्षु वेधाः ॥

अस्य। शासुः। उभयासः। सचन्ते। हविष्मन्तः। उशिजः। ये। च। मर्ताः। दिवः। चित्। पूर्वः। नि। असादि। होता। आऽपृच्छ्यः। विश्पतिः। विक्षु। वेधाः ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 4 Varga » 26 Mantra » 2

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(ये) जो (हविष्मन्तः) उत्तम सामग्रीयुक्त (उशिजः) शुभ गुण कर्मों की कामना करनेहारे (उभयासः) राजा और प्रजा के (मर्त्ताः) मनुष्य जिस (अस्य) इस (शासुः) सत्यन्याय के शासन करनेवाले (विक्षु) प्रजाओं में (सचन्ते) संयुक्त होते हैं, जो (होता) शुभ कर्मों का ग्रहण करनेहारा (आपृच्छ्यः) सब प्रकार के प्रश्नों के पूछने योग्य (वेधाः) विविध विद्या का धारण करनेवाला (विश्पतिः) प्रजाओं का स्वामी (दिवः) प्रकाश के (पूर्वः) पूर्व स्थित सूर्य के (चित्) समान धार्मिक जनों ने जो राज्यपालन के लिये नियुक्त किया हो (च) वही सब मनुष्यों को आश्रय करने के योग्य है ॥ २ ॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है। मनुष्यों को योग्य है कि जो विद्वान् धर्मात्मा और न्यायाधीशों से प्रशंसा को प्राप्त हों, जिनके शील से सब प्रजा सन्तुष्ट हो, उनकी सेवा पिता के समान सब लोग करें ॥ २ ॥
Subject
फिर वह कैसा है, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है ॥