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Rigveda Mandal 1 / Sukta 6 / Mantra 4

191 Sukta
10 Mantra
1/6/4
Devata- मरूतः Rishi- मधुच्छन्दाः वैश्वामित्रः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
आदह॑ स्व॒धामनु॒ पुन॑र्गर्भ॒त्वमे॑रि॒रे। दधा॑ना॒ नाम॑ य॒ज्ञिय॑म्॥

आत् । अह॑ । स्व॒धाम् । अनु॑ । पुनः॑ । ग॒र्भ॒ऽत्वम् आ॒ऽई॒रि॒रे । दधा॑नाः । नाम॑ । य॒ज्ञिय॑म् ॥

Mantra without Swara
आदह स्वधामनु पुनर्गर्भत्वमेरिरे। दधाना नाम यज्ञियम्॥

आत्। अह। स्वधाम्। अनु। पुनः। गर्भऽत्वम् आऽईरिरे। दधानाः। नाम। यज्ञियम्॥

Ashtak » 1 Adhyay » 1 Varga » 11 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
जैसे मरुतः वायु (नाम) जल और (यज्ञियम्) यज्ञ के योग्य देश को (दधानाः) सब पदार्थों को धारण किये हुए (पुनः) फिर-फिर (स्वधामनु) जलों में (गर्भत्वम्) उनके समूहरूपी गर्भ को (एरिरे) सब प्रकार से प्राप्त होते कम्पाते, वैसे (आत्) उसके उपरान्त वर्षा करते हैं, ऐसे ही वार-वार जलों को चढ़ाते वर्षाते हैं॥४॥
Essence
जो जल सूर्य्य वा अग्नि के संयोग से छोटा-छोटा हो जाता है, उसको धारण कर और मेघ के आकार को बना के वायु ही उसे फिर-फिर वर्षाता है, उसी से सब का पालन और सब को सुख होता है।इसके पीछे वायु अपने स्वभाव के अनुकूल बालक के स्वरूप में बन गये और अपना नाम पवित्र रख लिया। देखिये मोक्षमूलर साहब का किया अर्थ मन्त्रार्थ से विरुद्ध है, क्योंकि इस मन्त्र में बालक बनना और अपना पवन नाम रखना, यह बात ही नहीं है। यहाँ इन्द्र नामवाले वायु का ही ग्रहण है, अन्य किसी का नहीं॥४॥
Subject
अगले मन्त्र में वायु के कर्मों का उपदेश किया है-