Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 56 / Mantra 3

191 Sukta
6 Mantra
1/56/3
Devata- इन्द्र: Rishi- सव्य आङ्गिरसः Chhanda- निचृज्जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
स तु॒र्वणि॑र्म॒हाँ अ॑रे॒णु पौंस्ये॑ गि॒रेर्भृ॒ष्टिर्न भ्रा॑जते तु॒जा शवः॑। येन॒ शुष्णं॑ मा॒यिन॑माय॒सो मदे॑ दु॒ध्र आ॒भूषु॑ रा॒मय॒न्नि दाम॑नि ॥

सः । तु॒र्वणिः॑ । म॒हान् । अ॒रे॒णु । पौंस्ये॑ । गि॒रेः । भृ॒ष्टिः । न । भ्रा॒ज॒ते॒ । तु॒जा । शवः॑ । येन॑ । शुष्ण॑म् । मा॒यिन॑म् । आ॒य॒सः । मदे॑ । दु॒ध्रः । आ॒भूषु॑ । रा॒मय॑त् । नि । दाम॑नि ॥

Mantra without Swara
स तुर्वणिर्महाँ अरेणु पौंस्ये गिरेर्भृष्टिर्न भ्राजते तुजा शवः। येन शुष्णं मायिनमायसो मदे दुध्र आभूषु रामयन्नि दामनि ॥

सः। तुर्वणिः। महान्। अरेणु। पौंस्ये। गिरेः। भृष्टिः। न। भ्राजते। तुजा। शवः। येन। शुष्णम्। मायिनम्। आयसः। मदे। दुध्रः। आभूषु। रामयत्। नि। दामनि ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 4 Varga » 21 Mantra » 3

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे उत्तम वर की इच्छा करनेहारी कन्या ! जैसे तू जो (तुर्वणिः) शीघ्र सुखकारी (दुध्रः) बल से पूर्ण (आयसः) विज्ञान से युक्त (महान्) सर्वोत्कृष्ट (पौंस्ये) पुरुषार्थयुक्त व्यवहार में प्रवीण (तुजा) दुःखों का नाशक (आभूषु) सब प्रकार सबको सुभूषितकारक (अरेणु) क्षयरहित कर्म को (मदे) हर्षित होने में (रमयत्) क्रीड़ा का हेतु (शवः) उत्तम बल को प्राप्त हो के (न) जैसे (गिरेः) मेघ के (भृष्टिः) उत्तम शिखर (भ्राजते) प्रकाशित होते हैं, वैसे (तम्) उस (शुष्णम्) बलयुक्त (मायिनम्) अत्युत्तम बुद्धिमान् वर को (येन) जिस बल से (दामनि) सुखदायक गृहाश्रम में स्वीकार करती हो, वैसे (सः) वह वर भी तुझे उसी बल से प्रेमबद्ध करे ॥ ३ ॥
Essence
इस मन्त्र में उपमा वाचकलुप्तोपमालङ्कार हैं। अति उत्तम विवाह वह है, जिसमें तुल्य रूप स्वभाव युक्त कन्या और वर का सम्बन्ध होवे, परन्तु कन्या से वर का बल और आयु दूना वा ड्योढ़ा होना चाहिये ॥ ३ ॥
Subject
फिर वे दोनों कैसे हों, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है ॥

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.