Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 54 / Mantra 2

191 Sukta
11 Mantra
1/54/2
Devata- इन्द्र: Rishi- सव्य आङ्गिरसः Chhanda- निचृज्जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
अर्चा॑ श॒क्राय॑ शा॒किने॒ शची॑वते शृ॒ण्वन्त॒मिन्द्रं॑ म॒हय॑न्न॒भि ष्टु॑हि। यो धृ॒ष्णुना॒ शव॑सा॒ रोद॑सी उ॒भे वृषा॑ वृष॒त्वा वृ॑ष॒भो न्यृ॒ञ्जते॑ ॥

अर्च॑ । श॒क्राय॑ । शा॒किने॑ । शची॑ऽवते । शृ॒ण्वन्त॑म् । इन्द्र॑म् । म॒हय॑न् । अ॒भि । स्तु॒हि॒ । यः । धृ॒ष्णुना॑ । शव॑सा । रोद॑सी॒ इति॑ । उ॒भे इति॑ । वृषा॑ । वृ॒ष॒ऽत्वा । वृ॒ष॒भः । नि॒ऽऋ॒ञ्जते॑ ॥

Mantra without Swara
अर्चा शक्राय शाकिने शचीवते शृण्वन्तमिन्द्रं महयन्नभि ष्टुहि। यो धृष्णुना शवसा रोदसी उभे वृषा वृषत्वा वृषभो न्यृञ्जते ॥

अर्च। शक्राय। शाकिने। शचीऽवते। शृण्वन्तम्। इन्द्रम्। महयन्। अभि। स्तुहि। यः। धृष्णुना। शवसा। रोदसी इति। उभे इति। वृषा। वृषऽत्वा। वृषभः। निऽऋञ्जते ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 4 Varga » 17 Mantra » 2

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! तुम जैसे (वृषा) जल वर्षाने और (वृषभः) वर्षा के निमित्त बादलों को प्रसिद्ध करानेहारा सूर्य्य (वृषत्वा) सुखों की वर्षा के तत्त्व और (धृष्णुना) दृढ़ता आदि गुणयुक्त (शवसा) आकर्षण बल से (उभे) दोनों (रोदसी) द्यावापृथिवी को (न्यृञ्जते) निरन्तर प्रसिद्ध करता है, वैसे (यः) जो तू राज्य का यथायोग्य प्रबन्ध करता है, उस (शाकिने) प्रशंसनीय शक्ति आदि गुणयुक्त (शचीवते) प्रशंसित बुद्धिमान् (शक्राय) समर्थ के लिये (अर्च) सत्कार कर, उस सबके न्याय को (शृण्वन्तम्) श्रवण करनेवाले (इन्द्रम्) प्रशंसनीय ऐश्वर्ययुक्त सभाध्यक्ष का (महयन्) सत्कार करता हुआ (अभिष्टुहि) गुणों की प्रशंसा किया कर ॥ २ ॥
Essence
जो गुणों की अधिकता होने से सार्वभौम सभाध्यक्ष धर्म से सबको शिक्षा देकर धर्म के नियमों में स्थापन करता है, उसी का सब मनुष्यों को सेवन वा आश्रय करना चाहिये ॥ २ ॥
Subject
फिर वह कैसा है, यह विषय अगले मन्त्र में कहा है ॥