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Rigveda Mandal 1 / Sukta 50 / Mantra 9

191 Sukta
13 Mantra
1/50/9
Devata- सूर्यः Rishi- प्रस्कण्वः काण्वः Chhanda- पिपीलिकामध्यानिचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अयु॑क्त स॒प्त शु॒न्ध्युवः॒ सूरो॒ रथ॑स्य न॒प्त्यः॑ । ताभि॑र्याति॒ स्वयु॑क्तिभिः ॥

अयु॑क्त । स॒प्त । शु॒न्ध्युवः॑ । सूरः॑ । रथ॑स्य । न॒प्त्यः॑ । ताभिः॑ । या॒ति॒ । स्वयु॑क्तिऽभिः ॥

Mantra without Swara
अयुक्त सप्त शुन्ध्युवः सूरो रथस्य नप्त्यः । ताभिर्याति स्वयुक्तिभिः ॥

अयुक्त । सप्त । शुन्ध्युवः । सूरः । रथस्य । नप्त्यः । ताभिः । याति । स्वयुक्तिभिः॥

Ashtak » 1 Adhyay » 4 Varga » 8 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
हे ईश्वर ! जैसे (सूरः) सबका प्रकाशक जो (सप्त) पूर्वोक्त सात (नप्तः) नाश से रहित (शुन्ध्युवः) शुद्धि करनेवाली किरणें हैं उनको (रथस्य) रमणीयस्वरूप में (अयुक्त) युक्त करता और उनसे सहित प्राप्त होता है वैसे आप (ताभिः) उन (स्वयुक्तिभिः) अपनी युक्तियों से सब संसार को संयुक्त रखते हो ऐसा हमको दृढ़ निश्चय है ॥९॥
Essence
इस मंत्र में वाचकलुप्तोपमालंकार है। जो सूर्य के समान आपही आपसे प्रकाश स्वरूप आकाश के तुल्य सर्वत्र व्यापक उपासकों को पवित्रकर्त्ता परमात्मा है वही सब मनुष्यों का उपास्यदेव है ॥९॥
Subject
फिर वह कैसा है, इस विषय का उपदेश अगले मंत्र में किया है।