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Rigveda Mandal 1 / Sukta 50 / Mantra 5

191 Sukta
13 Mantra
1/50/5
Devata- सूर्यः Rishi- प्रस्कण्वः काण्वः Chhanda- यवमध्याविराड्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
प्र॒त्यङ् दे॒वानां॒ विशः॑ प्र॒त्यङ्ङुदे॑षि॒ मानु॑षान् । प्र॒त्यङ्विश्वं॒ स्व॑र्दृ॒शे ॥

प्र॒त्यङ् । दे॒वाना॑म् । विशः॑ । प्र॒त्यङ् । उत् । ए॒षि॒ । मानु॑षान् । प्र॒त्यङ् । विश्व॑म् । स्वः॑ । दृ॒शे ॥

Mantra without Swara
प्रत्यङ् देवानां विशः प्रत्यङ्ङुदेषि मानुषान् । प्रत्यङ्विश्वं स्वर्दृशे ॥

प्रत्यङ् । देवानाम् । विशः । प्रत्यङ् । उत् । एषि । मानुषान् । प्रत्यङ् । विश्वम् । स्वः । दृशे॥

Ashtak » 1 Adhyay » 4 Varga » 7 Mantra » 5

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1 Bhashyas
Meaning
हे जगदीश्वर ! जो आप (देवानाम्) दिव्य पदार्थों वा विद्वानों के (विशः) प्रजा (मानुषान्) मनुष्यों को (प्रत्यङ्ङुदेषि) अच्छे प्रकार प्राप्त हो और सब के आत्माओं में (प्रत्यङ्) प्राप्त होते हो इससे (विश्वस्वर्दृशे) सब सुखों के देखने के अर्थ सबों के (प्रत्यङ्) प्रत्यगात्मरूप से उपासनीय हो ॥५॥
Essence
जिससे ईश्वर सब कहीं व्यापक सबके आत्मा का जाननेवाला और सब कर्मों का साक्षी है इसलिये यही सब सज्जन लोगों को नित्य उपासना करने के योग्य है ॥५॥
Subject
फिर वह जगदीश्वर कैसा है, इस विषय का उपदेश अगले मंत्र में किया है।