Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 50 / Mantra 2

191 Sukta
13 Mantra
1/50/2
Devata- सूर्यः Rishi- प्रस्कण्वः काण्वः Chhanda- पिपीलिकामध्यानिचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अप॒ त्ये ता॒यवो॑ यथा॒ नक्ष॑त्रा यन्त्य॒क्तुभिः॑ । सूरा॑य वि॒श्वच॑क्षसे ॥

अप॑ । त्ये । ता॒यवः॑ । य॒था॒ । नक्ष॑त्रा । य॒न्ति॒ । अ॒क्तुऽभिः॑ । सूरा॑य । वि॒श्वऽच॑क्षसे ॥

Mantra without Swara
अप त्ये तायवो यथा नक्षत्रा यन्त्यक्तुभिः । सूराय विश्वचक्षसे ॥

अप । त्ये । तायवः । यथा । नक्षत्रा । यन्ति । अक्तुभिः । सूराय । विश्वचक्षसे॥

Ashtak » 1 Adhyay » 4 Varga » 7 Mantra » 2

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे स्त्री पुरुषो ! तुम (यथा) जैसे (अक्तुभिः) रात्रियों के साथ (नक्षत्रा) नक्षत्र आदि क्षय रहित लोक और (तायवः) वायु (विश्वचक्षसे) विश्व के दिखानेवाले (सूराय) सूर्य्य लोक के अर्थ (अपयन्ति) संयुक्त वियुक्त होते हैं वैसे ही विवाहित स्त्रियों के साथ संयुक्त वियुक्त हुआ करो ॥२॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालंकार है। जैसे रात्रि में नक्षत्र लोक चन्द्रमा के साथ और प्राण शरीर के साथ वर्त्तते हैं वैसे विवाह करके स्त्री और पुरुष आपस में वर्त्ता करें ॥२॥
Subject
फिर कौन किसके लिये क्या करें, इस विषय का उपदेश अगले मंत्र में किया है।