Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 5 / Mantra 8

191 Sukta
10 Mantra
1/5/8
Devata- इन्द्र: Rishi- मधुच्छन्दाः वैश्वामित्रः Chhanda- पादनिचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
त्वां स्तोमा॑ अवीवृध॒न्त्वामु॒क्था श॑तक्रतो। त्वां व॑र्धन्तु नो॒ गिरः॑॥

त्वाम् । स्तोमाः॑ । अ॒वी॒वृ॒ध॒न् । त्वाम् । उ॒क्था । श॒त॒क्र॒तो॒ इति॑ शतऽक्रतो । त्वाम् । व॒र्ध॒न्तु॒ । नः॒ । गिरः॑ ॥

Mantra without Swara
त्वां स्तोमा अवीवृधन्त्वामुक्था शतक्रतो। त्वां वर्धन्तु नो गिरः॥

त्वाम्। स्तोमाः। अवीवृधन्। त्वाम्। उक्था। शतक्रतो इति शतऽक्रतो। त्वाम्। वर्धन्तु। नः। गिरः॥

Ashtak » 1 Adhyay » 1 Varga » 10 Mantra » 3

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे (शतक्रतो) असंख्यात कर्मों के करने और अनन्त विज्ञान के जाननेवाले परमेश्वर ! जैसे (स्तोमाः) वेद के स्तोत्र तथा (उक्था) प्रशंसनीय स्तोत्र आपको (अवीवृधन्) अत्यन्त प्रसिद्ध करते हैं, वैसे ही (नः) हमारी (गिरः) विद्या और सत्यभाषणयुक्त वाणी भी (त्वाम्) आपको (वर्धन्तु) प्रकाशित करे॥८॥
Essence
जो विश्व में पृथिवी सूर्य्य आदि प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रचे हुए पदार्थ हैं, वे सब जगत् की उत्पत्ति करनेवाले तथा धन्यवाद देने के योग्य परमेश्वर ही को प्रसिद्ध करके जनाते हैं, जिससे न्याय और उपकार आदि ईश्वर के गुणों को अच्छी प्रकार जानके विद्वान् भी वैसे ही कर्मों में प्रवृत्त हों॥८॥
Subject
ईश्वर ने उक्त अर्थ ही के प्रकाश करनेवाले इन्द्र शब्द का अगले मन्त्र में भी प्रकाश किया है-

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.