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Rigveda Mandal 1 / Sukta 5 / Mantra 7

191 Sukta
10 Mantra
1/5/7
Devata- इन्द्र: Rishi- मधुच्छन्दाः वैश्वामित्रः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
आ त्वा॑ विशन्त्वा॒शवः॒ सोमा॑स इन्द्र गिर्वणः। शं ते॑ सन्तु॒ प्रचे॑तसे॥

आ । त्वा॒ । वि॒श॒न्तु॒ । आ॒शवः॑ । सोमा॑सः । इ॒न्द्र॒ । गि॒र्व॒णः॒ । शम् । ते॒ । स॒न्तु॒ । प्रऽचे॑तसे ॥

Mantra without Swara
आ त्वा विशन्त्वाशवः सोमास इन्द्र गिर्वणः। शं ते सन्तु प्रचेतसे॥

आ। त्वा। विशन्तु। आशवः। सोमासः। इन्द्र। गिर्वणः। शम्। ते। सन्तु। प्रऽचेतसे॥

Ashtak » 1 Adhyay » 1 Varga » 10 Mantra » 2

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Meaning
हे धार्मिक (गिर्वणः) प्रशंसा के योग्य कर्म करनेवाले (इन्द्र) विद्वान् जीव ! (आशवः) वेगादि गुण सहित सब क्रियाओं से व्याप्त (सोमासः) सब पदार्थ (त्वा) तुझ को (आविशन्तु) प्राप्त हों, तथा इन पदार्थों को प्राप्त हुए (प्रचेतसे) शुद्ध ज्ञानवाले (ते) तेरे लिये (शम्) ये सब पदार्थ मेरे अनुग्रह से सुख करनेवाले (सन्तु) हों॥७॥
Essence
ईश्वर ऐसे मनुष्यों को आशीर्वाद देता है कि जो मनुष्य विद्वान् परोपकारी होकर अच्छी प्रकार नित्य उद्योग करके इन सब पदार्थों से उपकार ग्रहण करके सब प्राणियों को सुखयुक्त करता है, वही सदा सुख को प्राप्त होता है, अन्य कोई नहीं॥७॥
Subject
उक्त काम के आचरण करनेवाले जीव को आशीर्वाद कौन देता है, इस बात का प्रकाश अगले मन्त्र में किया है-

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