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Rigveda Mandal 1 / Sukta 5 / Mantra 10

191 Sukta
10 Mantra
1/5/10
Devata- इन्द्र: Rishi- मधुच्छन्दाः वैश्वामित्रः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
मा नो॒ मर्ता॑ अ॒भिद्रु॑हन्त॒नूना॑मिन्द्र गिर्वणः। ईशा॑नो यवया व॒धम्॥

मा । नः॒ । मर्ताः॑ । अ॒भि । द्रु॒ह॒न् । त॒नूना॑म् । इ॒न्द्र॒ । गि॒र्व॒णः॒ । ईशा॑नः । य॒व॒य॒ । व॒धम् ॥

Mantra without Swara
मा नो मर्ता अभिद्रुहन्तनूनामिन्द्र गिर्वणः। ईशानो यवया वधम्॥

मा। नः। मर्ताः। अभि। द्रुहन्। तनूनाम्। इन्द्र। गिर्वणः। ईशानः। यवय। वधम्॥

Ashtak » 1 Adhyay » 1 Varga » 10 Mantra » 5

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1 Bhashyas
Meaning
हे (गिर्वणः) वेद वा उत्तम-उत्तम शिक्षाओं से सिद्ध की हुई वाणियों करके सेवा करने योग्य सर्वशक्तिमान् (इन्द्र) सब के रक्षक (ईशानः) परमेश्वर ! आप (नः) हमारे (तनूनाम्) शरीरों के (वधम्) नाश (मा) कभी मत (यवय) कीजिये, तथा आपके उपदेश से (मर्त्ताः) ये सब मनुष्य लोग भी (नः) हम से (मा) (अभिद्रुहन्) वैर कभी न करें॥१०॥
Essence
कोई मनुष्य अन्याय से किसी प्राणी को मारने की इच्छा न करे, किन्तु परस्पर मित्रभाव से वर्त्तें, क्योंकि जैसे परमेश्वर विना अपराध से किसी का तिरस्कार नहीं करता, वैसे ही सब मनुष्यों को भी करना चाहिये॥१०॥
Subject
किसकी रक्षा से पुरुषार्थ सिद्ध होता है, इस विषय का प्रकाश ईश्वर ने अगले मन्त्र में किया है-