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Rigveda Mandal 1 / Sukta 5 / Mantra 1

191 Sukta
10 Mantra
1/5/1
Devata- इन्द्र: Rishi- मधुच्छन्दाः वैश्वामित्रः Chhanda- विराड्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
आ त्वेता॒ निषी॑द॒तेन्द्र॑म॒भि प्र गा॑यत। सखा॑यः॒ स्तोम॑वाहसः॥

आ । तु । आ । इ॒त॒ । नि । सी॒द॒त॒ । इन्द्र॑म् । अ॒भि । प्र । गा॒य॒त॒ । सखा॑यः॒ । स्तोम॑ऽवाहसः ॥

Mantra without Swara
आ त्वेता निषीदतेन्द्रमभि प्र गायत। सखायः स्तोमवाहसः॥

आ। तु। आ। इत। नि। सीदत। इन्द्रम्। अभि। प्र। गायत। सखायः। स्तोमऽवाहसः॥

Ashtak » 1 Adhyay » 1 Varga » 9 Mantra » 1

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1 Bhashyas
Meaning
हे (स्तोमवाहसः) प्रशंसनीय गुणयुक्त वा प्रशंसा कराने और (सखायः) सब से मित्रभाव में वर्त्तनेवाले विद्वान् लोगो ! तुम और हम लोग सब मिलके परस्पर प्रीति के साथ मुक्ति और शिल्पविद्या को सिद्ध करने में (आनिषीदत) स्थित हों अर्थात् उसकी निरन्तर अच्छी प्रकार से यत्नपूर्वक साधना करने के लिये (इन्द्रम्) परमेश्वर वा बिजली से युक्त वायु को-इन्द्रेण वायुना० इस ऋग्वेद के प्रमाण से शिल्पविद्या और प्राणियों के जीवन हेतु से इन्द्र शब्द से स्पर्शगुणवाले वायु का भी ग्रहण किया है- (अभिप्रगायत) अर्थात् उसके गुणों का उपदेश करें और सुनें कि जिससे वह अच्छी रीति से सिद्ध की हुई विद्या सब को प्रकट होजावे, (तु) और उसी से तुम सब लोग सब सुखों को (एत) प्राप्त होओ॥१॥
Essence
जब तक मनुष्य हठ, छल और अभिमान को छोड़कर सत्य प्रीति के साथ परस्पर मित्रता करके परोपकार करने के लिये तन मन और धन से यत्न नहीं करते, तब तक उनके सुखों और विद्या आदि उत्तम गुणों की उन्नति कभी नहीं हो सकती॥१॥
Subject
पाँचवें सूक्त के प्रथम मन्त्र में इन्द्र शब्द से परमेश्वर और स्पर्शगुणवाले वायु का प्रकाश किया है-