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Rigveda Mandal 1 / Sukta 49 / Mantra 2

191 Sukta
4 Mantra
1/49/2
Devata- उषाः Rishi- प्रस्कण्वः काण्वः Chhanda- निचृदनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
सु॒पेश॑सं सु॒खं रथं॒ यम॒ध्यस्था॑ उष॒स्त्वम् । तेना॑ सु॒श्रव॑सं॒ जनं॒ प्रावा॒द्य दु॑हितर्दिवः ॥

सु॒ऽपेश॑सम् । सु॒खम् । रथ॑म् । यम् । अ॒धि॒ऽअस्थाः॑ । उ॒षः॒ । त्वम् । तेन॑ । सु॒ऽश्रव॑सम् । जन॑म् । प्र । अ॒व॒ । अ॒द्य । दु॒हि॒तः॒ । दि॒वः॒ ॥

Mantra without Swara
सुपेशसं सुखं रथं यमध्यस्था उषस्त्वम् । तेना सुश्रवसं जनं प्रावाद्य दुहितर्दिवः ॥

सुपेशसम् । सुखम् । रथम् । यम् । अधिअस्थाः । उषः । त्वम् । तेन । सुश्रवसम् । जनम् । प्र । अव । अद्य । दुहितः । दिवः॥

Ashtak » 1 Adhyay » 4 Varga » 6 Mantra » 2

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (दिवः) प्रकाशमान सूर्य्य की (दुहितः) पुत्री ही के तुल्य (उषः) वर्त्तमान स्त्रि ! तू (यम्) जिस (सुपेशसम्) सुन्दर रूप (सुखम्) आनन्दकारक (रथम्) क्रीड़ा के साधन यान से (अध्यस्थाः) ऊपर बैठने वाले प्राणी आनन्द को बढ़ाते हैं (तेन) उस रथ से (सुश्रवम्) उत्तम श्रवण युक्त (जनम्) विद्वान् मनुष्य की (प्राव) अच्छे प्रकार रक्षा आदि कर ॥२॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालंकार है। मनुष्य लोग जैसे सूर्य्य के प्रकाश से सुरूप की प्रसिद्धि होती है वैसे ही विदुषी स्त्री से घर का काम और पुत्रों की उत्पत्ति होती है ऐसा जानकर उनसे उपकार लेवें ॥२॥
Subject
फिर वह कैसी है, इस विषय का उपदेश अगले मंत्र में किया है।