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Rigveda Mandal 1 / Sukta 48 / Mantra 9

191 Sukta
16 Mantra
1/48/9
Devata- उषाः Rishi- प्रस्कण्वः काण्वः Chhanda- विराट्पथ्याबृहती Swara- मध्यमः
Mantra with Swara
उष॒ आ भा॑हि भा॒नुना॑ च॒न्द्रेण॑ दुहितर्दिवः । आ॒वह॑न्ती॒ भूर्य॒स्मभ्यं॒ सौभ॑गं व्यु॒च्छन्ती॒ दिवि॑ष्टिषु ॥

उषः॑ । आ । भा॒हि॒ । भा॒नुना॑ । च॒न्द्रेण॑ । दु॒हि॒तः॒ । दि॒वः॒ । आ॒ऽवह॑न्ती । भूरि॑ । अ॒स्मभ्य॑म् । सौभ॑गम् । वि॒ऽउ॒च्छन्ती॑ । दिवि॑ष्टिषु ॥

Mantra without Swara
उष आ भाहि भानुना चन्द्रेण दुहितर्दिवः । आवहन्ती भूर्यस्मभ्यं सौभगं व्युच्छन्ती दिविष्टिषु ॥

उषः । आ । भाहि । भानुना । चन्द्रेण । दुहितः । दिवः । आवहन्ती । भूरि । अस्मभ्यम् । सौभगम् । विउच्छन्ती । दिविष्टिषु॥

Ashtak » 1 Adhyay » 4 Varga » 4 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
हे (दिवः) सूर्य्य के प्रकाश की (दुहितः) पुत्री के तुल्य कन्ये ! जैसे (उषाः) प्रकाशमान उषा (भानुना) सूर्य्य और (चन्द्रेण) चन्द्रमा से (अस्मभ्यम्) हम पुरुषार्थी लोगों के लिये (भूरि) बहुत (सौभगम्) ऐश्वर्य्य के समूहों को (आवहन्ती) सब ओर से प्राप्त कराती (दिविष्टिषु) प्रकाशित कान्तियों में (व्युच्छन्ती) निवास कराती हुई संसार को प्रकाशित करती है वैसे ही तू विद्या और शमादि से सुशोभित हो ॥९॥
Essence
इस मंत्र में वाचकलुप्तोपमालंकार है। जैसे विदुषी धार्मिक कन्या दोनों माता और पति के कुलों को उज्ज्वल करती है वैसे उषा दोनों स्थूल सूक्ष्म अर्थात् बड़ी छोटी वस्तुओं को प्रकाशित करती है ॥९॥
Subject
फिर वह कैसी होके क्या करे, इस विषय का उपदेश अगले मंत्र में किया है।