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Rigveda Mandal 1 / Sukta 48 / Mantra 3

191 Sukta
16 Mantra
1/48/3
Devata- उषाः Rishi- प्रस्कण्वः काण्वः Chhanda- विराट्पथ्याबृहती Swara- मध्यमः
Mantra with Swara
उ॒वासो॒षा उ॒च्छाच्च॒ नु दे॒वी जी॒रा रथा॑नाम् । ये अ॑स्या आ॒चर॑णेषु दध्रि॒रे स॑मु॒द्रे न श्र॑व॒स्यवः॑ ॥

उ॒वास॑ । उ॒षाः । उ॒च्छात् । च॒ । नु । दे॒वी । जी॒रा । रथा॑नाम् । ये । अ॒स्याः॒ । आ॒ऽचर॑णेषु । द॒ध्रि॒रे । स॒मु॒द्रे । न । श्र॒व॒स्यवः॑ ॥

Mantra without Swara
उवासोषा उच्छाच्च नु देवी जीरा रथानाम् । ये अस्या आचरणेषु दध्रिरे समुद्रे न श्रवस्यवः ॥

उवास । उषाः । उच्छात् । च । नु । देवी । जीरा । रथानाम् । ये । अस्याः । आचरणेषु । दध्रिरे । समुद्रे । न । श्रवस्यवः॥

Ashtak » 1 Adhyay » 4 Varga » 3 Mantra » 3

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
जो स्त्री उषा के समान (जीरा) वेगयुक्त (देवी) सुख देने वाली (रथानाम्) आनन्ददायक यानों के (उषास) वसती है (ये) जो (अस्याः) इस सती स्त्री के (आचरणेषु) धर्म्म युक्त आचरणों में (समुद्रेन) जैसे सागर में (श्रवस्यवः) अपने आप विद्या के सुनने वाले विद्वान् लोग उत्तम नौका से जाते आते हैं वैसे (दध्रिरे) प्रीति को धरते हैं वे पुरुष अत्यन्त आनन्द को प्राप्त होते हैं ॥३॥
Essence
इस मंत्र में उपमालंकार है। जिसको अपने समान विदुषी पंडिता और सर्वथा अनुकूल स्त्री मिलती है वह सुख को प्राप्त होता है और नहीं ॥३॥
Subject
फिर वह कैसी हो, इस विषय का उपदेश अगले मंत्र में किया है।