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Rigveda Mandal 1 / Sukta 47 / Mantra 9

191 Sukta
10 Mantra
1/47/9
Devata- अश्विनौ Rishi- प्रस्कण्वः काण्वः Chhanda- विराट्पथ्याबृहती Swara- मध्यमः
Mantra with Swara
तेन॑ नास॒त्या ग॑तं॒ रथे॑न॒ सूर्य॑त्वचा । येन॒ शश्व॑दू॒हथु॑र्दा॒शुषे॒ वसु॒ मध्वः॒ सोम॑स्य पी॒तये॑ ॥

तेन॑ । ना॒स॒त्या॒ । आ । ग॒त॒म् । रथे॑न । सूर्य॑ऽत्वचा । येन॑ । शश्व॑त् । ऊ॒हथुः॑ । दा॒शुषे॑ । वसु॑ । मध्वः॑ । सोम॑स्य । पी॒तये॑ ॥

Mantra without Swara
तेन नासत्या गतं रथेन सूर्यत्वचा । येन शश्वदूहथुर्दाशुषे वसु मध्वः सोमस्य पीतये ॥

तेन । नासत्या । आ । गतम् । रथेन । सूर्यत्वचा । येन । शश्वत् । ऊहथुः । दाशुषे । वसु । मध्वः । सोमस्य । पीतये॥

Ashtak » 1 Adhyay » 4 Varga » 2 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
हे (नासत्या) सत्याचरण करने हारे सभासेना के स्वामी ! आप (येन) जिस (सूर्य्यत्वचा) सूर्य्य की किरणों के समान भास्वर (रथेन) गमन करानेवाले विमानादि यान से (आगतम्) अच्छे प्रकार आगमन करें (तेन) उससे (दाशुषे) दानशील मनुष्य के लिये (मध्वः) मधुरगुणयुक्त (सोमस्य) पदार्थसमूह के (पीतये) पान वा भोग के अर्थ (वसु) कार्य्यरूपी द्रव्य को (ऊहथुः) प्राप्त कराइये ॥९॥
Essence
राजपुरुष जैसे अपने हित के लिये प्रयत्न करते हैं उसी प्रकार प्रजा के सुख के लिये भी प्रयत्न करें ॥९॥
Subject
फिर वे क्या करें, इस विषय का उपदेश अगले मंत्र में किया है।