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Rigveda Mandal 1 / Sukta 46 / Mantra 6

191 Sukta
15 Mantra
1/46/6
Devata- अश्विनौ Rishi- प्रस्कण्वः काण्वः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
या नः॒ पीप॑रदश्विना॒ ज्योति॑ष्मती॒ तम॑स्ति॒रः । ताम॒स्मे रा॑साथा॒मिष॑म् ॥

या । नः॒ । पीप॑रत् । अ॒श्वि॒ना॒ । ज्योति॑ष्मती । तमः॑ । ति॒रः । ताम् । अ॒स्मे इति॑ । रा॒सा॒था॒म् । इष॑म् ॥

Mantra without Swara
या नः पीपरदश्विना ज्योतिष्मती तमस्तिरः । तामस्मे रासाथामिषम् ॥

या । नः । पीपरत् । अश्विना । ज्योतिष्मती । तमः । तिरः । ताम् । अस्मे इति । रासाथाम् । इषम्॥

Ashtak » 1 Adhyay » 3 Varga » 34 Mantra » 1

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Meaning
हे (अश्विना) सभासेनाध्यक्षो ! जैसे सूर्य्य और चन्द्रमा की (ज्योतिष्मती) उत्तम प्रकाश युक्त कान्ति (तमः) रात्रि का निवारण करके प्रभात और शुक्लपक्ष से सबका पोषण करते हैं वैसे (अस्मे) हमारी अविद्या को छुड़ा विद्या का प्रकाश कर (नः) हम सबको (ताम्) उस (इषम्) अन्न आदि को (रसाथाम्) दिया करो ॥६॥
Essence
यहां वाचकलुप्तोपमालंकार है। जिस प्रकार सूर्य्य और चन्द्रमा अन्धकार को दूर कर प्राणियों को सुखी करते हैं वैसे ही सभा और सेना के अध्यक्षों को चाहिये कि अन्याय दूर कर प्रजा को सुखी करें ॥६॥
Subject
फिर सूर्य्य चन्द्रमा के समान सभा सेनापति क्या करें, इस विषय का उपदेश अगले मंत्र में किया है।

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