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Rigveda Mandal 1 / Sukta 46 / Mantra 5

191 Sukta
15 Mantra
1/46/5
Devata- अश्विनौ Rishi- प्रस्कण्वः काण्वः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
आ॒दा॒रो वां॑ मती॒नां नास॑त्या मतवचसा । पा॒तं सोम॑स्य धृष्णु॒या ॥

आ॒दा॒रः । वा॒म् । म॒ती॒नाम् । नास॑त्या । म॒त॒ऽव॒च॒सा॒ । पा॒तम् । सोम॑स्य । धृ॒ष्णु॒ऽया ॥

Mantra without Swara
आदारो वां मतीनां नासत्या मतवचसा । पातं सोमस्य धृष्णुया ॥

आदारः । वाम् । मतीनाम् । नासत्या । मतवचसा । पातम् । सोमस्य । धृष्णुया॥

Ashtak » 1 Adhyay » 3 Varga » 33 Mantra » 5

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1 Bhashyas
Meaning
हे (नासत्या) पवित्र गुण स्वभाव युक्त (मतवचसा) ज्ञान से बोलने वाले सभा सेना के पति ! तुम जो (वाम्) तुम्हारे (आदारः) सब प्रकार से शत्रुओं को विदारण कर्त्ता गुण हैं उस और (धृष्णुया) प्रगल्भता से (सोमस्य) ऐश्वर्य्य और (मतीनाम्) मनुष्यों की (पातम्) रक्षा करो ॥५॥
Essence
राजपुरुषों को चाहिये कि दृढ़ बल युक्त सेना से शत्रुओं को जीत अपनी प्रजा के ऐश्वर्य्य की निरन्तर वृद्धि किया करें ॥५॥
Subject
फिर वे कैसे हैं, इस विषय का उपदेश अगले मंत्र में किया है।