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Rigveda Mandal 1 / Sukta 46 / Mantra 4

191 Sukta
15 Mantra
1/46/4
Devata- अश्विनौ Rishi- प्रस्कण्वः काण्वः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ह॒विषा॑ जा॒रो अ॒पां पिप॑र्ति॒ पपु॑रिर्नरा । पि॒ता कुट॑स्य चर्ष॒णिः ॥

ह॒विषा॑ । जा॒रः । अ॒पाम् । पिप॑र्ति । पपु॑रिः । न॒रा॒ । पि॒ता । कुट॑स्य । च॒र्ष॒णिः ॥

Mantra without Swara
हविषा जारो अपां पिपर्ति पपुरिर्नरा । पिता कुटस्य चर्षणिः ॥

हविषा । जारः । अपाम् । पिपर्ति । पपुरिः । नरा । पिता । कुटस्य । चर्षणिः॥

Ashtak » 1 Adhyay » 3 Varga » 33 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
हे (नरा) नीति के सिखाने पढ़ाने और उपदेश करने हारे लोगो ! तुम जैसे (जारः) विभाग कर्त्ता (पपुरिः) अच्छे प्रकार पूर्त्ति (पिता) पालन करने (कुटस्य) कुटिल मार्ग को (चर्षणिः) दिखलाने हारा सूर्य (हविषा) आहुति से बढ़कर (अपाम्) जलों के योग से (पिपर्त्ति) पूरण कर प्रजाओं का पालन करता है वैसे प्रजा का पालन करो ॥४॥
Essence
मनुष्यों को योग्य है कि जैसे सविता वर्षा के द्वारा जिलाने के योग्य प्राणी और अप्राणियों को पुष्ट करता है वैसे ही सबको पुष्ट करें ॥४॥
Subject
फिर वह कैसा है, इस विषय का उपदेश अगले मंत्र में किया है।