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Rigveda Mandal 1 / Sukta 46 / Mantra 13

191 Sukta
15 Mantra
1/46/13
Devata- अश्विनौ Rishi- प्रस्कण्वः काण्वः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
वा॒व॒सा॒ना वि॒वस्व॑ति॒ सोम॑स्य पी॒त्या गि॒रा । म॒नु॒ष्वच्छं॑भू॒ आ ग॑तम् ॥

वा॒व॒सा॒ना । वि॒वस्व॑ति । सोम॑स्य । पी॒त्या । गि॒रा । म॒नु॒ष्वत् । श॒म्भू॒ इति॑ शम्ऽभू । आ । ग॒त॒म् ॥

Mantra without Swara
वावसाना विवस्वति सोमस्य पीत्या गिरा । मनुष्वच्छंभू आ गतम् ॥

वावसाना । विवस्वति । सोमस्य । पीत्या । गिरा । मनुष्वत् । शम्भू इति शम्भू । आ । गतम्॥

Ashtak » 1 Adhyay » 3 Varga » 35 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
हे (वावसाना) अत्यन्त सुख में वसाने (शम्भू) सुखों के उत्पन्न करनेवाले पढ़ाने और सत्य के उपदेश करनेहारे ! आप (विवस्वति) सूर्य्य के प्रकाश में (सोमस्य) उत्पन्न हुए जगत् के मध्य में (पीत्या) रक्षा रूपी क्रिया वा (गिरा) वाणी से हमको (मनुष्वत्) रक्षा करनेहारे मनुष्यों के तुल्य (आ) (गतम्) सब प्रकार प्राप्त हूजिये ॥१३॥
Essence
हे मनुष्यो ! तुम जिस प्रकार परोपकारी मनुष्य प्राणियों के निवास और विद्याप्रकाश के दान से सुखों को प्राप्त कराते हैं वैसे तुम भी उन को प्राप्त कराओ ॥१३॥
Subject
फिर वे कैसे हैं इस विषय का उपदेश अगले मंत्र में किया है।