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Rigveda Mandal 1 / Sukta 46 / Mantra 12

191 Sukta
15 Mantra
1/46/12
Devata- अश्विनौ Rishi- प्रस्कण्वः काण्वः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
तत्त॒दिद॒श्विनो॒रवो॑ जरि॒ता प्रति॑ भूषति । मदे॒ सोम॑स्य॒ पिप्र॑तोः ॥

तत्ऽत॑त् । इत् । अ॒श्विनोः॑ । अवः॑ । ज॒रि॒ता । प्रति॑ । भू॒ष॒ति॒ । मदे॑ । सोम॑स्य । पिप्र॑तोः ॥

Mantra without Swara
तत्तदिदश्विनोरवो जरिता प्रति भूषति । मदे सोमस्य पिप्रतोः ॥

तत्तत् । इत् । अश्विनोः । अवः । जरिता । प्रति । भूषति । मदे । सोमस्य । पिप्रतोः॥

Ashtak » 1 Adhyay » 3 Varga » 35 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
जो (जरिता) स्तुति करनेवाला विद्वान् मनुष्य (पिप्रतोः) पूरण करनेवाले (अश्विनोः) सभा और सेनापति से (सोमस्य) उत्पन्न हुए जगत् के बीच (मदे) आनन्द युक्त व्यवहार में (अवः) रक्षादि को (प्रतिभूषति) अलंकृत करता है (तत्तत्) उस-२ सुख को प्राप्त होता है ॥१२॥
Essence
कोई भी विद्वानों से शिक्षा वा क्रिया को ग्रहण किये विना सब सुखों को प्राप्त नहीं हो सकता इससे उसका खोज नित्य करना चाहिये ॥१२॥
Subject
फिर सभा और सेनापति अश्वियों से क्या पाना चाहिये इस विषय का उपदेश अगले मंत्र में किया है।