Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 45 / Mantra 8

191 Sukta
10 Mantra
1/45/8
Devata- अग्निर्देवाः Rishi- प्रस्कण्वः काण्वः Chhanda- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
आ त्वा॒ विप्रा॑ अचुच्यवुः सु॒तसो॑मा अ॒भि प्रयः॑ । बृ॒हद्भा बिभ्र॑तो ह॒विरग्ने॒ मर्ता॑य दा॒शुषे॑ ॥

आ । त्वा॒ । विप्राः॑ । अ॒चु॒च्य॒वुः॒ । सु॒तऽसो॑माः । अ॒भि । प्रयः॑ । बृ॒हत् । भाः । बिभ्र॑तः । ह॒विः । अग्ने॑ । मर्ता॑य । दा॒शुषे॑ ॥

Mantra without Swara
आ त्वा विप्रा अचुच्यवुः सुतसोमा अभि प्रयः । बृहद्भा बिभ्रतो हविरग्ने मर्ताय दाशुषे ॥

आ । त्वा । विप्राः । अचुच्यवुः । सुतसोमाः । अभि । प्रयः । बृहत् । भाः । बिभ्रतः । हविः । अग्ने । मर्ताय । दाशुषे॥

Ashtak » 1 Adhyay » 3 Varga » 32 Mantra » 3

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (अग्ने) बिजुली के समान वर्त्तमान विद्वन् ! जो तू जैसे क्रियाओं में कुशल (दाशुषे) दानशील मनुष्य के लिये (प्रयः) अन्न (बृहत्) बड़े सुख करनेवाले (हविः) देने लेने योग्य पदार्थ और (भाः) जो प्रकाश कारक क्रियाओं को (बिभ्रतः) धारण करते हुए (सुतसोमाः) ऐश्वर्ययुक्त (विप्राः) विद्वान् लोग (त्वा) तुझको (अभ्यचुच्यवुः) सब प्रकार प्राप्त हों वैसे तू भी इन को प्राप्त हो ॥८॥
Essence
विद्वान् मनुष्यों को चाहिये जिस प्रकार उत्तम सुख हों उसको विद्याविशेष परीक्षा से प्रत्यक्ष कर अनुक्रम से सबको ग्रहण करावें जिससे इन लोगों के भी सब काम निश्चय करके सिद्ध होवें ॥८॥
Subject
फिर उसको कैसा जानें, इस विषय का उपदेश अगले मंत्र में किया है।