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Rigveda Mandal 1 / Sukta 43 / Mantra 7

191 Sukta
9 Mantra
1/43/7
Devata- सोमः Rishi- कण्वो घौरः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ॒स्मे सो॑म॒ श्रिय॒मधि॒ नि धे॑हि श॒तस्य॑ नृ॒णाम् । महि॒ श्रव॑स्तुविनृ॒म्णम् ॥

अ॒स्मे इति॑ । सो॒म॒ । श्रिय॑म् । अधि॑ । नि । धे॒हि॒ । श॒तस्य॑ । नृ॒णाम् । महि॑ । श्रवः॑ । तु॒वि॒ऽनृ॒म्णम् ॥

Mantra without Swara
अस्मे सोम श्रियमधि नि धेहि शतस्य नृणाम् । महि श्रवस्तुविनृम्णम् ॥

अस्मे इति । सोम । श्रियम् । अधि । नि । धेहि । शतस्य । नृणाम् । महि । श्रवः । तुविनृम्णम्॥

Ashtak » 1 Adhyay » 3 Varga » 27 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
हे (सोम) जगदीश्वर सभाध्यक्ष वा आप (अस्मे) हम लोगों के लिये वा हम लोगों के (शतस्य) बहुत (नृणाम्) वीरपुरुषों के (तुविनृम्णम्) अनेक प्रकार के धन (महि) पूज्य वा बहुत (श्रवः) विद्या का श्रवण और (श्रियम्) राज्यलक्ष्मी को (आधिनिधेहि) स्थापन कीजिये ॥७॥
Essence
इस मन्त्र में श्लेषालङ्कार है। कोई प्राणी परमेश्वर की कृपा सभाध्यक्ष की सहायता वा अपने पुरुषार्थ के विना पूर्ण विद्या पशु चक्रवर्त्ती, राज्य और लक्ष्मी को प्राप्त नहीं हो सकता ॥७॥
Subject
अब अगले मंत्र में रुद्र के गुणों का उपदेश किया है।