Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 43 / Mantra 6

191 Sukta
9 Mantra
1/43/6
Devata- रुद्रः Rishi- कण्वो घौरः Chhanda- पादनिचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
शं नः॑ कर॒त्यर्व॑ते सु॒गं मे॒षाय॑ मे॒ष्ये॑ । नृभ्यो॒ नारि॑भ्यो॒ गवे॑ ॥

शन् । नः॒ । क॒र॒ति॒ । अर्व॑ते । सु॒ऽगम् । मे॒षाय॑ । मे॒ष्ये॑ । नृऽभ्यः॑ । नारि॑ऽभ्यः । गवे॑ ॥

Mantra without Swara
शं नः करत्यर्वते सुगं मेषाय मेष्ये । नृभ्यो नारिभ्यो गवे ॥

शन् । नः । करति । अर्वते । सुगम् । मेषाय । मेष्ये । नृभ्यः । नारिभ्यः । गवे॥

Ashtak » 1 Adhyay » 3 Varga » 27 Mantra » 1

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
जो रुद्रस्वामी (नः) हम लोगों की (अर्वते) अश्वजाती (मेषाय) मेषजाति (मेष्ये) भेड़ बकरी (नृभ्यः) मनुष्य जाति (नारिभ्यः) स्त्री जाती और (गवे) गो जाति के लिये (सुगम्) सुगम् (शम्) सुख को (करति) निरन्तर करै वही न्यायाधीश करना चाहिये ॥६॥
Essence
मनुष्यों को अपने वा पराए पशु, मनुष्यों के लिये परमेश्वर की प्रार्थना, विद्वानों की सहायता, प्राणवायुओं से यथावत् उपयोग और अपना पुरुषार्थ करना चाहिये ॥६॥
Subject
वह उसके लिये क्या करता है, इस विषय का उपदेश अगले मंत्र में किया है।