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Rigveda Mandal 1 / Sukta 43 / Mantra 5

191 Sukta
9 Mantra
1/43/5
Devata- रुद्रः Rishi- कण्वो घौरः Chhanda- विराड्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
यः शु॒क्रइ॑व॒ सूर्यो॒ हिर॑ण्यमिव॒ रोच॑ते । श्रेष्ठो॑ दे॒वानां॒ वसुः॑ ॥

यः । शु॒क्रःऽइ॑व । सूर्यः॑ । हिर॑ण्यम्ऽइव । रोच॑ते । श्रेष्ठः॑ । दे॒वानाम् । वसुः॑ ॥

Mantra without Swara
यः शुक्रइव सूर्यो हिरण्यमिव रोचते । श्रेष्ठो देवानां वसुः ॥

यः । शुक्रःइव । सूर्यः । हिरण्यम्इव । रोचते । श्रेष्ठः । देवानाम् । वसुः॥

Ashtak » 1 Adhyay » 3 Varga » 26 Mantra » 5

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(यः) जो पूर्व कहा हुआ रुद्र सेनापति (सूर्य्यः शुक्र इव) तेजस्वी शुद्ध भास्कर सूर्य के समान (हिरण्यमिव) सुवर्ण के तुल्य प्रीति कारक (देवानाम्) सब विद्वान् वा पृथिवी आदि के मध्य में (श्रेष्ठः) अत्युत्तम (वसुः) सम्पूर्ण प्राणी मात्र का वसानेवाला (रोचते) प्रीति कारक हो उसको सेना का प्रधान करो ॥५॥
Essence
इस मंत्र में उपमालंकार है। मनुष्यों को उचित है कि जैसा परमेश्वर सब ज्योतियों का ज्योति आनन्दकारियों का आनन्दकारी श्रेष्ठों का श्रेष्ठ विद्वानों का विद्वान् आधारों का आधार है, वैसे ही जो न्यायकारियों में न्यायकारी आनन्द देने वालों में आनन्द देने वाला श्रेष्ठ स्वभाव वालों में श्रेष्ठ स्वभाववाला विद्वानों में विद्वान् और वास हेतुओं का वासहेतु वीर पुरुष हो उसको सभाध्यक्ष मानना चाहिये ॥५॥
Subject
फिर वह कैसा है, इस विषय का उपदेश अगले मंत्र में किया है।