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Rigveda Mandal 1 / Sukta 43 / Mantra 4

191 Sukta
9 Mantra
1/43/4
Devata- रुद्रः Rishi- कण्वो घौरः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
गा॒थप॑तिं मे॒धप॑तिं रु॒द्रं जला॑षभेषजम् । तच्छं॒योः सु॒म्नमी॑महे ॥

गा॒थऽप॑तिम् । मे॒धऽप॑तिम् । रु॒द्रम् । जला॑षऽभेषजम् । तत् । श॒म्ऽयोः । सु॒म्नम् । ई॒म॒हे॒ ॥

Mantra without Swara
गाथपतिं मेधपतिं रुद्रं जलाषभेषजम् । तच्छंयोः सुम्नमीमहे ॥

गाथपतिम् । मेधपतिम् । रुद्रम् । जलाषभेषजम् । तत् । शम्योः । सुम्नम् । ईमहे॥

Ashtak » 1 Adhyay » 3 Varga » 26 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! जैसे हम लोग (गाथपतिम्) स्तुति करनेवालों के पालक (मेधपतिम्) यज्ञ वा पवित्र पुरुषों की पालना करनेवाले (जलाषभेषजम्) जिससे सुख के लिये ओषधी हो उस (रुद्रम्) परमेश्वर के आश्रम होकर (तत्) उस विज्ञान वा (शंयोः) व्यावहारिक पारमार्थिक सुख से भी (सुम्नम्) मोक्ष के सुख की (ईमहे) याचना करते हैं वैसे तुम भी करो ॥४॥
Essence
कोई भी मनुष्य स्तुति यज्ञ वा दुःखों के नाश करनेवाली ओषधियों की प्राप्ति करानेवाले परमेश्वर विद्वान् और प्राणायाम के विना विज्ञान और लौकिक सुख वा मोक्ष सुख प्राप्त होने के योग्य नहीं हो सकता ॥४॥
Subject
फिर वह रुद्र कैसा है, इस विषय का उपदेश अगले मंत्र में किया है।