Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 43 / Mantra 3

191 Sukta
9 Mantra
1/43/3
Devata- मित्रावरुणौ Rishi- कण्वो घौरः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
यथा॑ नो मि॒त्रो वरु॑णो॒ यथा॑ रु॒द्रश्चिके॑तति । यथा॒ विश्वे॑ स॒जोष॑सः ॥

यथा॑ । नः॒ । मि॒त्रः । वरु॑णः । यथा॑ । रु॒द्रः । चिके॑तति । यथा॑ । विश्वे॑ । स॒ऽजोष॑सः ॥

Mantra without Swara
यथा नो मित्रो वरुणो यथा रुद्रश्चिकेतति । यथा विश्वे सजोषसः ॥

यथा । नः । मित्रः । वरुणः । यथा । रुद्रः । चिकेतति । यथा । विश्वे । सजोषसः॥

Ashtak » 1 Adhyay » 3 Varga » 26 Mantra » 3

Bhashya

More bhashyas
Meaning
(यथा) जैसे (मित्रः) सखा वा प्राण (वरुणः) उत्तम उपदेष्टा वा उदान (यथा) जैसे (रुद्रः) परमेश्वर (नः) हम लोगों को (चिकेतति) ज्ञानयुक्त करते हैं (यथा) जैसे (विश्वे) सब (सजोषसः) स्वतुल्य प्रीति सेवन करने वाले विद्वान् लोग सब विद्याओं के जाननेवाले होते हैं, वैसे यथार्थ वक्ता पुरुष सबको जनाया करें ॥३॥
Essence
इस मंत्र में उपमालंकार है। जैसे विद्वान् लोग सब मनुष्यों को मित्रपन और उत्तम शील धारण कराकर उनके लिये यथार्थ विद्याओं की प्राप्ति और जैसे परमेश्वर ने वेदद्वारा सब विद्याओं का प्रकाश किया है, वैसे विद्वान् अध्यापकों को भी सब मनुष्यों को विद्यायुक्त करना चाहिये ॥३॥
Subject
अब सबके साथ विद्वान् लोग कैसे वर्त्तें, इस विषय का उपदेश अगले मंत्र में किया है।

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.